भारत-चीन में गलवान में झड़प की ख़बर, सेना ने किया इनकार

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● पूर्वा स्टार ब्यूरो

ऐसे समय जब भारत-चीन के विदेश मंत्री मिले और उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर शांति बनाए रखने पर ज़ोर दिया, यह ख़बर भी आ रही है कि भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों में झड़प हुई है। हालांकि, भारतीय सेना ने इससे इनकार किया है।

रक्षा विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ में लिखे एक लेख में दावा किया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना और पीपल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों के बीच झड़प हुई है।

बाद में ‘द वायर’ के लिए मशहूर पत्रकार करण थापर को दिए एक इंटरव्यू में अजय शुक्ला ने वह तारीख भी बताई है, जिस दिन उनके मुताबिक, पीएलए और भारतीय सेना में झड़प हुई। उन्होंने कहा कि यह झड़प 2 मई को हुई।

उन्होंने कहा है कि इसमें दोनों पक्षों के सैनिक मारे गए हैं या नहीं, यह उन्हें पक्के तौर पर पता नहीं है, लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है।

पैंगोंग त्सो में चीनी सेना

अजय शुक्ला ने ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ में छपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने पैंगोंग त्सो के दक्षिण तट और कैलाश रेंज में कई जगहों पर फिर से क़ब्ज़ा कर लिया है। ये वे जगहें हैं, जहाँ से चीन ने अपने सैनिकों को भारत के साथ हुई बातचीत के बाद वापस बुला लिया था।

यानी जिन जगहों को पीएलए ने क़रार के मुताबिक़, खाली कर दिया था, उनमें से कुछ जगहों पर उसने फिर से क़ब्जा कर लिया है।

इस झड़प की वजह यह है कि गलवान नदी के मोड़ पर पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास चीनी सेना ने एक टेन्ट लगाने की कोशिश की थी। लेकिन यह जगह दोनों देशों के बीच तय बफ़र ज़ोन में है, तो भारतीय सेना ने पीएलए की इस कोशिश का विरोध किया।

ड्रोन भी भेजे?

पिछले साल सर्दियों में पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने जिन जगहों को खाली कर दिया था, बर्फ पिघलने के बाद उनमें से कुछ जगहों पर कब्जा करने की कोशिशें कीं। यह इस साल अप्रैल में हुआ। इसी समय पीएलए ने भारतीय इलाक़े में कुछ ड्रोन भी भेजे थे।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारतीय सेना के गश्ती दलों ने मई-जून में दक्षिणी लद्दाख के डेमचोक और चुमार में चीनी सैनिकों के अतिरिक्त जमावड़े को देखा था और इसकी रिपोर्ट भी दी थी। कई चीनी सैनिक सादे कपड़ों में थे।’ इसके आगे कहा गया है,

लेकिन मई के बीचोबीच चीनी सेना ने आगे बढ़ कर कुछ जगहों पर क़ब्ज़ा करना शुरू कर दिया। इससे दोनों सेनाओं में तनाव बढ़ा। इसके बाद भारतीय सेना ने भी अपने सैनिकों को आगे भेजा।’

चीनी सेना देपसांग को लेकर अधिक चौकन्नी है क्योंकि भारत की सेना इससे आगे बढ़ते हुए चीन की सड़क जी-219 तक पहुँत सकती है। यह सड़क शिनजियांग और तिब्बत तक जाती है।

सेना ने किया इनकार

भारतीय सेना ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है। उसने इस ख़बर को ‘झूठा’ और ‘बेबुनियाद’ बताया है।

उसने साफ शब्दों में कहा है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच गलवान या किसी दूसरी जगह पर कोई झड़प नहीं हुई है।

सेना ने एक बयान में कहा है,

दोनों ही पक्ष बचे हुए मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं, सम्बन्धित इलाक़ों की नियमित गश्त चल रही है। अब तक की यही स्थिति है। सैनिकों के आने-जाने समेत पीएलए की सभी गतिविधियों पर भारतीय सेना की नज़र बनी हुई है। -भारतीय सेना के बयान का अंश

बयान में आगे कहा गया है, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनी हुई है। सेना ने कहा है कि यह रिपोर्ट ‘ग़लत जानकारियों’ से भरी हुई है और ‘बुरी नीयत’ से लिखी गई है।

रिपोर्ट पर कायम

लेकिन अजय शुक्ला अपनी रिपोर्ट पर कायम हैं। उन्होंने ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ में रिपोर्ट छपने और उस पर सेना के खंडन के बाद ‘द वायर’ से कहा कि उनकी रिपोर्ट पूरी तरह सही है।

अजय शुक्ला ने कहा है कि उन्हें अपने सूत्रों पर पूरा भरोसा है, उन्होंने एक सूत्र से जानकारी मिलने के बाद कम से कम एक दूसरे सूत्र से उसकी पुष्टि होने के बाद ही ख़बर लिखी है।

उन्होंने कहा कि चीनी सेना ने सीमा के पास रूस से लिया हुआ एस-400 एअर डिफेंस सिस्टम तैनात कर रखा है। इससे 400 किलोमीटर की दूर तक के विमान को निशाना बनाया जा सकता है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को ही ताज़िकिस्तान की राजधानी दुशानबे में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात की। उन्होंने इसमें साफ शब्दों में कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखना दोनों के बीच रिश्तों को सुधारने के लिए जरूरी है।

दोनों ही विदेश मंत्री इस पर सहमत थे के सीमा पर शांति बरक़रार रखी जाए। इस पर भी सहमति बनी कि दोनों देशों की सेनाएं कमान्डर स्तर पर फिर बातचीत करेंगी।

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