यूपी कांग्रेस का सेवा सत्याग्रह : गाँव-गाँव सेनेटाइज़ेशन और दवाओं के 10 लाख किट पहुंचाएगी कांग्रेस

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● गरिमा सिंह

लखनऊ। कोरोना से पैदा हुई मुसीबतों और लॉकडाउन जैसी स्थिति के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी पार्टी को लगातार सक्रिय बनाये हुए हैं। यूपी में विधानसभा चुनाव क़रीब हैं और प्रियंका जानती हैं कि ज़मीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय बनाये रखते हुए पार्टी को दौड़ में आगे रखा जा सकता है। चर्चा तो यह भी थी कि प्रियंका लखनऊ जाकर स्थायी रूप से रहेंगी, लेकिन लॉकडाउन की वजह से योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी।

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच कांग्रेस की ओर से सेवा सत्याग्रह शुरू किया गया है। इसके तहत प्रियंका गांधी की ओर से यूपी में दवाओं की 10 लाख किट भेजी गयी है। पहली खेप लखनऊ के आसपास जिलों के लिए रवाना भी कर दी गयी है।

गौरतलब है कि ग्रामीण इलाकों में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते बुखार तक की दवाओं की भारी किल्लत है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस होम आइसोलेशन कोरोना उपचार किट से लोगों को काफी राहत मिलेगी। किट में छः दवाओं के पत्ते हैं। हर दवा के इस्तेमाल करने के निर्देश भी किट पर लिखे हैं। कांग्रेस अपने ब्लॉक अध्यक्षों के जरिये चिकित्सकों के परामर्श पर यह किट वितरित करेगी। इतना ही नहीं सेवा सत्याग्रह अभियान के तहत गांवों का सेनेटाइजेशन भी किया जाना है। सेनेटाइजर की 18 हज़ार लीटर की पहली खेप भी लखनऊ पहुंच चुकी है।

सेवा के साथ हर गांव में पहुंचेगी प्रियंका की चिट्टी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पंचायत चुनावों में जीते हुए प्रतिनिधियों से पत्र के जरिये संवाद कर रहीं हैं। इसके पहले उन्होंने प्रधानों को नए साल की शुरुआत में कार्ड भेजकर शुभकामनाएं दी थीं। इस बार प्रियंका गांधी ने पंचायत प्रतिनिधियों को भेजे गए खत में जीत की बधाई के साथ कोरोना महामारी में सहयोग करने की अपील की है। ज़ाहिर है, प्रियंका गांधी अपनी चिट्ठी के जरिये गाँव-गाँव संवाद मेें जुटी हैं।

पूरे सूबे के नव निर्वाचित प्रधानों, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों को महासचिव प्रियंका गांधी का खत कांग्रेसी गांव-गांव पहुँचाने में लगे हैं।

प्रियंका गांधी ने अपने पत्र में लिखा है कि यह स्पष्ट हो चुका है कि सरकार की अधिकतम चिंता लोगों की जिंदगी बचाने में नहीं है बल्कि एक नेता की छवि बचाने में हैं। उन्होंने आगे लिखा है कि हमारे लिये दुर्भाग्य की बात है कि सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता देश होने के बावजूद देश में वैक्सीन की कमी है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि इंसानियत का यह तकाज़ा है कि राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर हम सबकी मदद करें।

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