यूपी पंचायत चुनावों पर किसान आंदोलन की आँच से बीजेपी सांसत में

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यूपी में पंचायत चुनाव होने हैं जिनका कार्यकाल बीते दिसंबर में ही ख़त्म हो चुका है। प्रदेश सरकार की योजना पहले फ़रवरी में और अब मार्च में चुनाव कराने की थी। लेकिन किसान आंदोलन के चलते उत्तर प्रदेश में ख़ुद को अपराजेय मान रही योगी सरकार के पसीने छूट रहे हैं।

● विवेक श्रीवास्तव / गरिमा सिंह

किसान आंदोलन के चलते उत्तर प्रदेश में ख़ुद को अपराजेय मान रही योगी सरकार के पसीने छूट रहे हैं। दिल्ली में चल रहे इस आंदोलन का व्यापक प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देखा जा रहा है तो अब इसने पूर्वी यूूपी में भी पाँव पसारना शुरू कर दिया है। किसान आक्रोश की आँच पश्चिम से चल कर पूर्व तक आ पहुँचने के बाद अब यूपी सरकार के लिए पंचायत चुनाव गले की हड्डी बन गया है। अभी तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आयोजित हो रही किसान पंचायतें अब पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी शुरू हो गयी हैं। यूपी में पंचायत चुनाव होने हैं जिनका कार्यकाल बीते दिसंबर में ही ख़त्म हो चुका है। प्रदेश सरकार की योजना पहले फ़रवरी में और अब मार्च में चुनाव कराने की थी। 

हालाँकि किसान आंदोलन के चलते अब योगी सरकार हाल फ़िलहाल तो चुनाव से बचना चाह रही है। पंचायत चुनावों में आधी से ज़्यादा सीटें पश्चिम यूपी में हैं जहाँ किसान आंदोलन का सबसे ज़्यादा प्रभाव नज़र आ रहा है। 

ख़ुद बीजेपी नेताओं का मानना है कि किसानों का ग़ुस्सा अब पूर्वी यूपी तक आ पहुँचा है और देर सबेर यह और तेज़ ही होगा।

पंचायत चुनाव में नुक़सान का डर

ताज़ा हालात में अगर उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव होते हैं तो बीजेपी को नुक़सान का डर दिख रहा है। हालाँकि किसान आंदोलन को देखते हुए पार्टी ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि वह पंचायत चुनाव अपने सिंबल पर नहीं लड़ेगी और ज़िला पंचायत सदस्य पदों पर वह अपना समर्थन देगी। पार्टी का मानना है कि वर्तमान हालात में चुनाव होने पर अधिकांश ज़िलों में ज़िला पंचायत अध्यक्ष से लेकर ब्लॉक प्रमुख के पदों पर अपने लोगों को बैठाना आसान नहीं होगा। पंचायत चुनावों में पीछे रह जाने का खामियाजा आगे आने वाले विधान परिषद के स्थानीय निकाय कोटे के सदस्य पदों के चुनाव में भी उठाना पड़ेगा।

पश्चिमी यूपी में बीजेपी नेताओं का विरोध?

कृषि क़ानूनों को लेकर पश्चिम यूपी के किसानों में इस कदर ग़ुस्सा है कि वहाँ के गाँवों में बीजेपी नेताओं के घुसने तक पर रोक लगा दी गयी है। पश्चिम की प्रमुख खेतिहर जाट बिरादरी बीते कई चुनावों से बीजेपी के साथ थी जो अब बिदक गयी है। टिकैत के आँसुओं ने उसके ग़ुस्से को और भड़का दिया है और वो अब मारपीट पर उतारू है।

पश्चिम के कई गाँवों में बाक़ायदा बीजेपी नेताओं के घुसने पर पाबंदी वाले बोर्ड लगे हैं और सार्वजनिक स्थानों पर लोग विरोध में नारेबाज़ी कर रहे हैं। हाल ही में पश्चिम यूपी से बीजेपी के ताक़तवर केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान के साथ गाँवों में विरोध और मारपीट की भी घटना हुई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर ज़िले के शाहपुर थाना क्षेत्र के गाँव सोरम में सोमवार को एक तेहरवीं में शामिल होने गए केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान व अन्य बीजेपी नेताओं के सामने मुर्दाबाद के नारे लगे। नारे लगाने को लेकर बीजेपी समर्थकों तथा किसानों के बीच जमकर मारपीट हुई। इससे पहले नए कृषि क़ानूनों के फ़ायदे बताने पहुँचे केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का रविवार को शामली में भारी विरोध हुआ था। शामली के भैंसवाल में संजीव बालियान और बीजेपी के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी हुई थी। आक्रोश इतना था कि ग्रामीणों ने मंत्री के काफिले के आगे ट्रैक्टर सटाकर उनको गाँव में घुसने नहीं दिया था।

खाप पंचायतों में ग़ुस्सा

किसान आंदोलन से हुए राजनैतिक नुक़सान को कम करने और कृषि क़ानून पर सरकार का पक्ष रखने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी की खाप पंचायतों से मुलाक़ात का दाँव उल्टा पड़ने लगा है। ताक़तवर जाट केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का जिस कदर विरोध पश्चिम यूपी में हो रहा है उसने बीजेपी के नेताओं को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार के लिए मजबूर कर दिया है। 

बीजेपी ने अब गाँवों में जाकर खाप पंचायतों के चौधरियों से मिलने के कार्यक्रम पर लगाम लगाने का मन बना लिया है।

पश्चिम में अब तक केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को दो जगहों पर किसानों, खासकर, जाटों के उग्र विरोध का सामना करना पड़ा है। वहीं राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के जयंत चौधरी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लगातार पश्चिम में किसान पंचायत कर रही हैं जहाँ भारी भीड़ उमड़ रही है। 

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