आंदोलन में साज़िश हुई, अमित शाह बर्खास्त किए जाएँ : कांग्रेस

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किसान आंदोलन में हिंसा के लिए कांग्रेस ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह बर्खास्त करने की मांग की है। इसने कहा कि आंदोलन को बदनाम करने की साज़िश रची गई। 

● पूर्वा स्टार ब्यूरो 

किसान आंदोलन में हिंसा के लिए कांग्रेस ने सीधे गृहमंत्री अमित शाह को बर्खास्त करने की मांग की है। कांग्रेस ने कहा कि आंदोलन को बदनाम करने की साज़िश रची गई। पार्टी ने कहा है कि देश की राजधानी में किसान आंदोलन की आड़ में हुई सुनियोजित हिंसा और अराजकता के लिए सीधे-सीधे अमित शाह जिम्मेदार हैं। कांग्रेस ने कहा, ‘इस संबंध में तमाम ख़ुफिया इनपुट के बावजूद हिंसा के तांडव को न रोक पाने में नाकामी के चलते उन्हें एक पल भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाए।’

इन तमाम घटनाक्रमों पर कांग्रेस की ओर से प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा कि एक साल के अंदर राष्ट्रीय राजधानी में दूसरी बार हुई इस हिंसा को रोक पाने में बुरी तरह विफल रहने वाले अमित शाह को गद्दी छोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भी उन्हें बर्खास्त नहीं करते तो यह साबित हो जाएगा कि अमित शाह से इस पूरी हिंसा में देश के प्रधानमंत्री की प्रत्यक्ष मिलीभगत है’।

कांग्रेस की यह प्रेस कॉन्फ़्रेंस उस मामले में हुई जब दिल्ली में मंगलवार को हालात इतने बिगड़ गए थे कि हिंसा तक हुई। इसमें एक व्यक्ति की जान भी चली गई। इससे पहले गणतंत्र दिवस समारोह के बीच ही दिल्ली में किसानों ने ट्रैक्टर की रैली निकालनी शुरू कर दी थी और हिंसा की ख़बरें आईं। पुलिस की ओर से लाठी चार्ज किया गया और आँसू गैस के गोले दागे गए। पथराव की भी घटनाएँ हुईं। प्रदर्शन करने वाले कुछ लोगों ने मंगलवार को लाल क़िले की प्राचीर से पीले रंग का झंडा फहरा दिया।

ट्रैक्टर रैली हिंसा में मंगलवार को कम से कम 300 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हिंसा के मामले में अब तक करीब दो दर्जन से अधिक एफ़आईआर दर्ज की जा चुकी हैं। क़रीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया है। कई किसान नेताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है। इस हिंसा के मामले को लेकर ही प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने मोदी सरकार और ख़ासकर अमित शाह को घेरा। उन्होंने कहा कि आज़ादी के 73 सालों में यह पहला मौक़ा है कि जब कोई सरकार लाल क़िले जैसी राष्ट्रीय धरोहर की भी रक्षा करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा, ‘किसानों के नाम पर साज़िश के तहत चंद उपद्रवियों को लाल क़िले में घुसने दिया गया। और दिल्ली पुलिस कुर्सियों पर बैठी आराम फरमाती रही।’ 

सुरजेवाला ने पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू को लेकर भी बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी के क़रीबी और मोदी-शाह के चेले दीप सिद्धू की पूरे समय लाल क़िले में मौजूदगी, इस उपद्रव में मौजूदगी किसान आंदोलन को बदनाम करने की एक सुनियोजित साज़िश है।

बता दें कि दीप सिद्धू की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। कई किसान नेताओं ने उनपर हिंसा की साज़िश रचने का आरोप लगाया है। किसान नेता राजिंदर सिंह ने हिंसा की स्थिति के लिए केंद्रीय एजेंसियों को दोषी ठहराया और कहा कि दीप सिद्धू ने भी ठीक भूमिका नहीं निभाई। बीकेयू हरियाणा के नेता गुरनाम सिंह चड़ूनी ने लाल क़िले मामले में युवाओं को गुमराह करने के लिए दीप सिद्धू की आलोचना की और उन्हें केंद्र सरकार का ‘दलाल’ बताया।

लाल क़िले की घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में दीप सिद्धू ने कहा था कि यह आंदोलन का परिणाम है जो कई महीनों से चल रहा है और एक व्यक्ति पर दोष नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि निशान साहिब और किसान यूनियन के झंडे भावनाओं के आवेग में फहराए गए।

किन किसान नेताओं पर एफ़आईआर, क्या हैं आरोप

कृषि क़ानूनों की माँग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों की गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली हिंसा में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की है। वह 25 एफ़आईआर दर्ज कर चुकी है। इनमें 37 किसान नेताओं के नाम हैं। जानिए किन प्रमुख किसान नेताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है और क्या हैं आरोप-
एफ़आईआर में संयुक्त किसान मोर्चा के जिन छह प्रवक्ताओं के नाम हैं, वे हैं-

• जगजीत सिंह दलेवाल, अध्यक्ष, बीकेयू (सिद्धपुर)
• लबीर सिंह राजेवाल, अध्यक्ष, बीकेयू (राजेवाल)
• दर्शन पाल, अध्यक्ष, क्रांतिकारी किसान यूनियन
• राकेश टिकैत, अध्यक्ष, बीकेयू
• कुलवंत सिंह संधू, महासचिव, जम्हूरी किसान सभा,
• योगेंद्र यादव, अध्यक्ष, स्वराज पार्टी इंडिया

इन प्रमुख किसान नेताओं के भी नाम

• सतनाम सिंह पन्नू, अध्यक्ष, किसान मज़दूर संघर्ष समिति
• कंवलप्रीत सिंह पन्नू, अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति
• जोगिंदर सिंह उग्राहन, अध्यक्ष, बीकेयू-उग्राहन
• सुरजीत सिंह फूल, अध्यक्ष, बीकेयू क्रांतिकारी
•गुरनाम सिंह चढ़ूनी, अध्यक्ष, बीकेयू हरियाणा
• बलविंदर सिंह औलख, अध्यक्ष, मेजा किसान समिति
• बूटा सिंह बुर्जगिल, अध्यक्ष, बीकेयू डकौंडा
• इंद्रजीत सिंह, अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति
• हरजिंदर सिंह टांडा, अध्यक्ष, आज़ाद किसान संघर्ष समिति, पंजाब
• गुरबख्श सिंह, अध्यक्ष, जय किसान आन्दोलन
• हरमीत सिंह कादियान, अध्यक्ष, बीकेयू कादियान
• सतनाम सिंह साहनी, महासचिव, बीकेयू (दोआबा)

इनके नाम भी FIR में

• मेधा पाटेकर
• वी एम सिंह
• अविक साहा

क्या हैं आरोप?

दंगे, आपराधिक साज़िश, हत्या की कोशिश और डकैती की धाराएँ लगाई गई हैं। एफ़आईआर में कहा गया है कि ‘दंगाइयों/ प्रदर्शनकारियों और उनके नेताओं का एक पूर्व-नियोजित उद्देश्य था जो सहमति से तय मार्ग का पालन नहीं कर रहे थे, इसी कारण हिंसा हुई।’ 

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