फिर बेनतीजा रही किसानों और सरकार के बीच बैठक
कृषि क़ानूनों को लेकर जारी गतिरोध के बीच किसानों और सरकार के बीच ग्यारहवें दौर की बैठक भी बेनतीजा रही।
● पूर्वा स्टार ब्यूरो
कृषि क़ानूनों को लेकर जारी गतिरोध के बीच किसानों और सरकार के बीच ग्यारहवें दौर की बैठक भी बेनतीजा रही। बैठक के बाद किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि सरकार ने किसानों के सामने एक बार फिर पुराना प्रस्ताव रखा लेकिन किसानों ने इसे मानने से इनकार कर दिया। अगली बैठक के लिए कोई तारीख़ भी तय नहीं की गई है। इसका मतलब साफ है कि अब आगे जल्द कोई बातचीत होनी मुश्किल है।
बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ‘किसानों के साथ यह चर्चा 14 अक्टूबर से चल रही है और ये कृषि क़ानून बिचौलियों और भ्रष्टाचार की समाप्ति के लिए लाए गए। सरकार का उद्देश्य था कि किसान मुनाफा कमा सकें। आंदोलन के दौरान किसान और जनता के बीच में ग़लतफहमी फैलाने की कोशिश की गई और कुछ लोगों ने किसानों के कंधों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित के लिए करने की कोशिश की।’
तोमर ने कहा, ‘बैठक के दौरान जब किसानों ने कहा कि वे सरकार के प्रस्ताव पर राजी नहीं हैं और क़ानूनों को रद्द करवाना चाहते हैं तो सरकार की ओर से कहा गया कि क़ानूनों को स्थगित करने का जो प्रस्ताव दिया गया है, वह किसानों और देश के हित में है।’
20 जनवरी को हुई दसवीं बैठक में सरकार की ओर से कृषि क़ानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव किसान नेताओं के सामने रखा गया था। लेकिन गुरूवार को इस प्रस्ताव को किसानों ने ठुकरा दिया। संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ किया है कि उन्हें कृषि क़ानूनों को रद्द करने और एमएसपी की क़ानूनी गारंटी देने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।
परेड निकालने पर अड़े किसान
दूसरी ओर, किसानों ने कहा है कि वे दिल्ली की बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे और गणतंत्र दिवस समारोह में किसी भी तरह की रुकावट पैदा नहीं करेंगे। किसान नेताओं ने कहा है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा।
किसान संयुक्त मोर्चा की ओर से कहा गया है कि परेड में शामिल ट्रैक्टर्स पर भारत का तिरंगा और किसानों की यूनियनों के झंडे लगे होंगे। परेड में इस आंदोलन में शहीद हुए लोगों के परिवार के सदस्य, सेना में रह चुके अफ़सर और नामी खिलाड़ी भी शामिल होंगे।
