किसानों ने ठुकराया सरकार का प्रस्ताव, जारी रहेगा आंदोलन
कृषि कानूनों को लेकर किसानों का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। किसानों ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें एक-डेढ़ साल तक के लिए कानूनों पर रोक लगाने की बात कही गई थी। किसानों ने फिर दोहराया है कि तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। किसानों का ये फैसला केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा झटका है।
● पूर्वा स्टार ब्यूरो
कृषि क़ानूनों को लेकर मोदी सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव को किसानों ने ठुकरा दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि क़ानूनों को रद्द करने और एमएसपी की क़ानूनी गारंटी देने से कम पर आंदोलन खत्म करने से साफ मना कर दिया है।
इससे पहले किसानों और सरकार के बीच बुधवार को हुई दसवें दौर की बातचीत में सरकार ने किसानों के सामने इन क़ानूनों को एक से डेढ़ साल तक स्थगित करने का प्रस्ताव रखा था।
किसानों के साथ बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि इस अवधि के दौरान किसान नेता और सरकार मिलकर इस मसले का हल निकालेंगे और तब तक सरकार इन क़ानूनों के क्रियान्वयन पर स्थगन के लिए तैयार है। कुल मिलाकर सरकार की ओर से किसानों को मनाने के लिए की गई कवायद बेकार होती दिख रही है। इस बीच, किसानों और सरकार के बीच कल फिर से बातचीत होगी।
केंद्र ने दिया था प्रस्ताव
26 जनवरी को होने जा रही किसानों की ट्रैक्टर रैली से ठीक पहले केंद्र सरकार ने किसानों के सामने एक प्रस्ताव रखा था। 10वें दौर की बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से कहा था कि, बीच का रास्ता अपनाया जाना चाहिए और कृषि कानूनों को फिलहाल एक या डेढ़ साल तक लागू नहीं किया जाएगा। इस दौरान सरकार और किसानों की एक कमेटी लगातार बातचीत करती रहेगी और मुद्दे का हल निकलने के बाद ही आगे कानूनों पर फैसला होगा। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने की भी बात कही गई थी।
प्रस्ताव के बाद आंदोलन नरम होने की थी उम्मीद
किसानों को दिए गए इस प्रस्ताव को लेकर कहा जा रहा था कि, किसान अपना रुख थोड़ा नरम कर सकते हैं। कई लोगों ने तो इसे आंदोलन खत्म होने की तरफ एक कदम बताया। खुद केंद्रीय कृषि मंत्री ने बैठक के बाद अपने प्रस्ताव को लेकर कहा था कि,
“मुझे खुशी है कि किसान यूनियनों ने इसे गंभीरता से लिया और कहा कि इस प्रस्ताव पर कल हम लोग विचार-विमर्श करेंगे और परसों दोबारा 12 बजे बैठक के लिए आएंगे और फैसला बताएंगे। मुझे लगता है कि बातचीत सार्थकता की ओर बढ़ रही है और संभावना व्यक्त की जा सकती है कि 22 तारीख को समाधान की ओर हम लोग बढ़ सकते हैं।”
लेकिन अब 22 जनवरी को होने वाली बैठक से पहले ही किसानों ने साफ कर दिया है कि उन्हें कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं है. जिससे 11वें दौर की इस बैठक का नतीजा भी साफ दिखने लगा है।

ट्रैक्टर मार्च की पूरी तैयारी, 3 लाख ट्रैक्टर्स होंगे शामिल
किसानों ने कहा है कि वे दिल्ली की बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। परेड में 3 लाख ट्रैक्टर्स शामिल होंगे। किसान नेताओं ने कहा है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा।
बताया गया कि, उत्तराखंड के बिलासपुर व रामपुर समेत अन्य जगहों पर किसान ट्रैक्टर मार्च कर दिल्ली की किसान परेड की तैयारी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में किसान 23 जनवरी को राजभवन का घेराव करेंगे और एक जत्था दिल्ली की तरफ भी रवाना होगा। किसान मोर्चा ने कहा कि, नवनिर्माण किसान संगठन की किसान दिल्ली चलो यात्रा, जो कि ओडिशा से चली थी, को उत्तर प्रदेश पुलिस बार-बार परेशान कर रही है। उनके रूट बदलने से लेकर बैठकें न करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। हम प्रशासन के इस बर्ताव का विरोध करते हैं।
किसान संयुक्त मोर्चा की ओर से कहा गया है कि सभी ट्रैक्टर्स पर भारत का तिरंगा और किसानों की यूनियनों के झंडे लगे होंगे। किसी भी राजनीतिक दल के झंडे लगाने की अनुमति नहीं होगी। परेड में इस आंदोलन में शहीद हुए लोगों के परिवार के सदस्य, सेना में रह चुके अफ़सर और नामी खिलाड़ी भी शामिल होंगे।
किसानों के साथ खड़ा हूं : राहुल
कृषि क़ानूनों के मसले पर ख़ासे मुखर राहुल गांधी ने मंगलवार को मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश की अर्थव्यवस्था को पूंजीपतियों को सौंपने का आरोप लगाया।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘आज तक खेती में मोनोपॉली नहीं थी, आज तक हिंदुस्तान के खेतों का फ़ायदा किसानों को, मजदूरों को, मिडिल क्लास को और ग़रीबों को जाता था। एक पूरा ढांचा था, जो इन लोगों की रक्षा करता था। लेकिन इन तीन क़ानून खेती में आज़ादी से पहले की हालत करने जा रहे हैं।’
राहुल गांधी ने कहा, ‘4-5 लोगों के हाथ में मोदी जी खेती का पूरा ढांचा दे रहे हैं। इसीलिए किसान बाहर खड़े हैं। हमारे युवाओं और मध्य वर्ग को इस बात को समझना होगा कि किसान अपनी रक्षा नहीं कर रहे हैं, वे हमारी और हमारे भोजन की रक्षा कर रहे हैं।’
‘मैं किसानों के आंदोलन का 100 फ़ीसदी समर्थन करता हूं और देश के हर नागरिक को उनका समर्थन करना चाहिए। इसके पीछे कारण यह है कि वे हमारे लिए लड़ रहे हैं न कि ख़ुद के लिए।’
धड़ाधड़ समन भेज रही एनआईए
एक ओर मोदी सरकार किसान आंदोलन में शामिल नेताओं से बातचीत कर रही है, दूसरी ओर केंद्रीय एजेंसियां आंदोलन का समर्थन करने वालों पर शिकंजा कस रही हैं। आढ़तियों, पंजाबी गायकों से शुरू हुआ यह सिलसिला लेखकों, पत्रकारों, व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक जा पहुंचा है।
एनआईए ने बीते कुछ दिनों में कई लोगों को समन भेजे हैं और गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक़ जिन लोगों को समन भेजा गया है, उन सभी को हाल ही में विदेशों से पैसा मिला है और इसके स्रोत संदेहास्पद हैं।
