पीएम केयर्स फंड : पारदर्शिता के सवाल पर सौ पूर्व नौकरशाहों ने लिखा प्रधानमंत्री मोदी को पत्र
कोरोना वायरस महामारी के समय बनाए गए पीएम-केयर्स फंड की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब सौ पूर्व नौकरशाहों ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किये हैं।
● डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला / पूर्वा स्टार
कोरोना वायरस महामारी के समय बनाए गए पीएम-केयर्स फंड की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई आरटीआई दायर कर इसके बारे में और जानकारी मांगी गई है लेकिन पीएमओ ने ऐसा करने से हर बार इनकार कर दिया। अब सौ रिटायर्ड नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखकर ‘पीएम केयर्स फंड की वित्तीय जानकारी सार्वजानिक करने’ की मांग की है।
पूर्व नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे खुले पत्र में ‘पीएम-केयर्स निधि’ में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाये हैं। उन्होंने लिखा है कि सार्वजनिक जवाबदेही के मानकों के पालन के मद्देनज़र प्राप्तियों और खर्चों का वित्तीय ब्योरा उपलब्ध कराना जरूरी है ताकि किसी तरह की अनियमितता के संदेह से बचा जा सके।
“ये जरूरी है कि प्रधानमंत्री की पोजीशन और कद बरकरार रखा जाए और इसके लिए प्रधानमंत्री से जुड़ी हर चीज में पारदर्शिता जरूरी है।”
पत्र का अंश
पूर्व अधिकारियों ने पत्र में लिखा है, ‘हम पीएम-केयर्स या आपात स्थिति में नागरिक सहायता और राहत के बारे में जारी बहस पर करीब से नज़र रख रहे हैं। यह कोष कोविड महामारी से प्रभावित लोगों के फायदे के लिए बनाया गया था। जिस उद्देश्य से यह कोष बनाया गया और जिस तरह से इसे संचालित किया गया, दोनों को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आवश्यक है कि प्रधानमंत्री से जुड़े समस्त लेनदेन में पूरी तरह पारदर्शिता सुनिश्चित करके प्रधानमंत्री के पद और दर्जे को अक्षुण्ण रखा जाए।’
पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व आईएएस अधिकारियों अनिता अग्निहोत्री, एस पी अंब्रोसे, शरद बेहार, सज्जाद हासन, हर्ष मंदर, पी जॉय ओमेन, अरुणा रॉय, पूर्व राजनयिकों मधु भादुड़ी, केपी फाबियान, देब मुखर्जी, सुजाता सिंह और पूर्व आईपीएस अधिकारियों एएस दुलात, पी जी जे नंबूदरी तथा जूलियो रिबेरो आदि प्रमुख हैं।
पीएम केयर्स पर शुरु से ही उठ रहे सवाल
पीएम केयर्स फंड को केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत में मार्च 2020 में बनाया था। ऐसा अनुमान है कि मई 2020 तक इस फंड में कम से कम 1.27 बिलियन डॉलर आ चुके थे।
लेकिन शुरुआत से ही इस फंड पर विवाद होता रहा है। सरकार इस फंड की वित्तीय जानकारी साझा करने से इनकार करती आई है। चंदे या इससे हुए खर्चे की जानकारी सार्वजानिक नहीं की गई है और न ही भारत के कॉम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने इसका ऑडिट किया है।
24 दिसंबर को एक आरटीआई के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा, “पीएम-केयर्स फंड पूरी तरह से व्यक्तियों, संगठनों, सीएसआर, विदेशी व्यक्तियों, विदेशी संगठनों और पीएसयू से प्राप्त अनुदानों से चलता है। यह किसी भी सरकार से वित्त पोषित नहीं है औऱ ट्रस्टी के तौर पर निजी व्यक्ति ही इसका संचालन करते हैं। इसलिए यह आरटीआई कानून की धारा 2 (एच) के तहत नहीं आता है। ऐसे में पीएम-केयर्स फंड को किसी भी तरह से सार्वजनिक निकाय नहीं माना जा सकता।”
एक आरटीआई के जवाब में कहा गया कि इस फंड को सरकार ने ‘स्थापित’ किया है और इसका ‘स्वामित्व’ भी सरकार के पास है, लेकिन फंड आरटीआई के दायरे में नहीं आता क्योंकि इसे निजी सूत्रों से पैसा मिला है।
