देश में कोरोना वैक्सीन की कीमत को लेकर उठ रहे सवाल
सीरम इंस्टीट्यूट की तरफ से मैन्युफैक्चर्ड जिस कोविशील्ड वैक्सीन को यूरोपीय यूनियन ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका करीब 159 रुपये में खरीद रहे हैं, भारत सरकार उसी वैक्सीन को करीब 200 रुपये में खरीद रही है। सरकार द्वारा ज्यादा कीमत चुकाये जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
● डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला/पूर्वा स्टार
देश में कोरोना वैक्सीन की ज्यादा कीमत पर खरीद को लेकर शुरु से ही सवाल उठाए जा रहे हैं। अब कोरोनावायरस वैक्सीन की कीमत को लेकर एक्सपर्ट्स भी सवाल उठा रहे हैं। इस बारे में जब पब्लिक हेल्थ एक्टिविस्ट और इंडस्ट्रीज के एक्सपर्ट से बातचीत की गई तो उनका कहना है कि सरकार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक की कोरोनावायरस वैक्सीन के लिए ज्यादा कीमत चुका रही है। खुले बाजार में कोरोना वैक्सीन की कीमत 1000 रुपये होने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार सीरम इंस्टीट्यूट की तरफ से मैन्युफैक्चर्ड कोविशील्ड वैक्सीन के लिए यूरोपीय यूनियन ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की इसी वैक्सीन के लिए चुकायी जा रही कीमत करीब 159 रुपये के मुकाबले प्रति डोज 41 रुपये ज्यादा, यानी 200 रुपये दे रही है। यूरोपीय यूनियन ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका द्वारा कोविशील्ड वैक्सीन करीब 159 रुपये में खरीदे जाने का खुलासा बेल्जियम के बजट स्टेट सेक्रेट्ररी के ट्विटर पर पोस्ट किए गए लीक हुए डॉक्युमेंट से हुआ है। भारत बायोटेक की वैक्सीन के लिए केंद्र सरकार 295 रुपये प्रति डोज कीमत दे रही है। वहीं वैक्सीन अभी भी क्लीनिकल ट्रायल मोड में हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण फेज 3 का डेटा अभी सामने आना बाकि है।
वैसे तो दुनियाभर में ड्रग और वैक्सीन की कीमतें सार्वजनिक न कर इन्हें कमर्शियली सीक्रेट ही रखा जाता है। लेकिन कोरोना महामारी ने अधिक पारदर्शिता और समानता की जरूरत को सामने रखा है।
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के लिए हैरानी की बात भारत में वैक्सीन की कीमतों का ज्यादा होना है। कई पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार वैक्सीन की कीमतों को लेकर और मोलभाव कर सकती थी। साथ ही सरकार को सभी के लिए मुफ्त वैक्सीन दी जानी चाहिए। जबकि प्रायोरिटी ग्रुप को छोड़कर अन्य को वैक्सीन लगाए जाने को लेकर सरकार की तरफ से अभी कोई कार्ययोजना सामने नहीं आयी है।
ज्यादा कीमत के सवाल पर सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला कहना है कि इस धरती पर कोई भी 200 रुपये से कम में इस वैक्सीन को नहीं दे रहा है। वे कहते हैं कि हमने इसके लिए सही कीमत रखी है और वैक्सीन की 2000 रुपये की कीमत (प्राइवेट रूप से खरीदने पर) लोगों को हॉस्पिटल खर्च के भारी बोझ से बचाएगी।
सीरम ने कोवैक्स अलायंस के तहत लो और मिडिल इनकम वाले देशों के लिए वैक्सीन की अधिकतम कीमत 3 डॉलर प्रति डोज रखी है। इस लिहाज से भी भारत में इस वैक्सीन की ज्यादा कीमत वसूली जा रही है।
इससे पहले सरकार की तरफ से 12 जून को कहा गया था कि भारत में निर्मित दोनों वैक्सीन किफायती कीमत पर लोगों के लिए उपलब्ध होंगी। वैक्सीन के अनुसंधान, परीक्षण और निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने इन कंपनियों को आर्थिक मदद के साथ ही कई तरह की सहुलियतें मुहैया कराई हैं जो जनता के धन से ही उपलब्ध कराई गई हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को चाहिए कि इन कंपनियों से बात करे और कम कीमत में वैक्सीन जनता को उपलब्ध कराये।
