सरकार-किसानों की बातचीत का आठवां दौर भी बेनतीजा, अब 15 को होगी नौवीं बैठक 

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कृषि क़ानूनों के मसले पर केंद्र सरकार और किसानों के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हुई आठवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही।

● पूर्वा स्टार ब्यूरो

कृषि क़ानूनों के मसले पर केंद्र सरकार और किसानों के बीच आठवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हुई बातचीत के दौरान जहां एक बार फिर सरकार ने कृषि क़ानूनों में संशोधन की बात कही वहीं, किसानों ने फिर से कहा कि उन्हें संशोधन नहीं चाहिए, बल्कि उनकी मांग क़ानूनों को रद्द करने की है। अगली बैठक 15 जनवरी को दिन में 12 बजे होगी। 

बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, कृषि विभाग के अफ़सर सहित 40 किसान संगठनों के नेता मौजूद रहे। किसानों ने बातचीत से पहले ही साफ़ कर दिया था कि वे कृषि क़ानूनों को रद्द करने और एमएसपी की क़ानूनी गारंटी देने पर ही बात करेंगे।

इंडिया टुडे के मुताबिक़, बैठक में सरकार ने कहा कि वह क़ानूनों को वापस नहीं ले सकती और नहीं लेगी। सरकार ने किसानों से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का इंतजार करने की बात कही। सरकार ने कहा कि अगर शीर्ष अदालत यह कहती है कि कृषि क़ानून अवैध हैं तो हम इन्हें वापस ले लेंगे लेकिन अगर अदालत कुछ और फ़ैसला देती है तो किसानों को अपना आंदोलन ख़त्म करना होगा। 

तेज हुआ आन्दोलन

सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसानों ने अपने आंदोलन को तेज़ कर दिया है। गुरूवार को किसानों ने कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस वे पर ट्रैक्टर रैली निकालकर केंद्र सरकार को अपनी ताक़त और एकजुटता का अहसास कराया। यह रैली 26 जनवरी को होने वाली किसान ट्रैक्टर परेड की रिहर्सल के तौर पर निकाली गई। किसानों ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौक़े पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने का एलान किया है। 

हर गांव से 10 ट्रैक्टर ट्राली

‘द हिंदू’ के मुताबिक़, भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रधान जोगिंदर नैन ने कहा है कि 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड के लिए हर गांव से कम से कम 10 ट्रैक्टर ट्राली भेजी जाएंगी। इसके अलावा हर किसान परिवार से एक सदस्य इस परेड में भेजने के लिए कहा गया है। इसके लिए 10 जनवरी से किसान नेता हरियाणा के सारे गांवों में अभियान शुरू करेंगे। किसान नेताओं ने कहा है कि इस तरह की ट्रैक्टर रैलियां पूरे देश भर में निकाली जाएंगी। इसके अलावा हरियाणा के कई टोल प्लाजा पर किसानों का आंदोलन जारी है।

भयंकर ठंड और बारिश के बावजूद किसानों के हौसले डिगे नहीं हैं और सिंघु से लेकर टिकरी, रेवाड़ी से लेकर ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर आंदोलनकारियों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है।

अमरिंदर ने जताई चिंता

न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसान आंदोलन के कारण राज्य की क़ानून व्यवस्था के बिगड़ने का अंदेशा जताया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि उनकी हमदर्दी किसानों के साथ है लेकिन वे राज्य की क़ानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि यह बेहद ज़रूरी है कि राज्य में हालात सामान्य हों और किसान अपने काम पर लौटें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वक़्त आ गया है कि प्रधानमंत्री इस मामले को गंभीरता से लें और इन क़ानूनों को ख़त्म करें वरना उनकी सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रूख़ करेगी।

खाप पंचायतें विरोध में

इस बीच, हरियाणा की जींद जिले की 10 खाप पंचायतों ने एलान किया है कि वे बीजेपी-जेजेपी के नेताओं को बागंड़ इलाक़े में घुसने नहीं देंगे। उन्होंने कहा है कि वे बीजेपी नेताओं के चौपाल कार्यक्रमों का विरोध करेंगे और अगर कोई नेता उनके गांव में आता है तो उसे काले झंडे भी दिखाएंगे। इसके लिए गांव गांव बैठकें हो रही हैं।

हम अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं और तब तक वापस नहीं जाएंगे जब तक ये कृषि क़ानून वापस नहीं हो जाते। ये कृषि क़ानून किसानों के लिए डेथ वारंट हैं और इनके लागू होने से किसान तबाह हो जाएंगे।

आन्दोलकारी किसान

किसान नेता इससे पहले भूख हड़ताल से लेकर भारत बंद का कार्यक्रम कर चुके हैं। हरियाणा में टोल प्लाजा फ्री करने का भी कार्यक्रम उन्होंने किया है। 27 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के दौरान किसानों ने थालियां बजाकर इसका विरोध किया था। 

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