‘प्रदर्शन किसानों का हक’ : सुप्रीम कोर्ट

Read Time: 4 minutes

● आलोक शुक्ल

किसान आंदोलन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार दूसरे दिन गुरुवार 17 दिसंबर को सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्रदर्शन किसानों का हक है। लेकिन विरोध प्रदर्शन तब तक संवैधानिक है, जब तक कि इससे संपत्ति को नुकसान नहीं हो या किसी की जान को खतरा नहीं हो। 

क्या हुआ सुप्रीम कोर्ट में?

सुनवाई शुरू होते ही वकील हरीश साल्वे ने कहा कि किसानों को रास्तों से हटाने की याचिकाएं आर्टिकल 32 के तहत दायर की गई हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उनसे पूछा कि आप किसकी ओर से पेश हो रहे हैं? साल्वे ने कहा- यूपी और हरियाणा की ओर से. इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि अभी कानून को लेकर चर्चा नहीं होगी। शुरुआत में सिर्फ प्रदर्शन को लेकर बहस होगी। कानून वैध है या नहीं, इस पर बाद में बहस हो सकती है।

हरीश साल्वे ने आगे दलील देते हुए कहा कि प्रदर्शन के अधिकार का मतलब ये नहीं कि शहर बंद कर दिया जाए। इस प्रदर्शन के कारण दिल्ली के लोग प्रभावित हुए हैं। ट्रांसपोर्ट पर असर पड़ा है। सामान के दाम बढ़ रहे हैं। अगर सड़कें बंद रहीं तो दिल्ली वालों को काफी दिक्कत होगी।

चीफ जस्टिस की ओर से कहा गया कि हम इस मामले में देखेंगे। किसी एक मसले की वजह से दूसरे के जीवन पर असर नहीं पड़ना चाहिए। विरोध प्रदर्शन तब तक संवैधानिक है, जब तक कि इससे संपत्ति को नुकसान नहीं हो या किसी की जान को खतरा नहीं हो।

चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि हम कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के अधिकार को समझते हैं, और इसे दबाने का सवाल ही नहीं उठता। हम केंद्र से पूछेंगे कि अभी प्रदर्शन किस तरह चल रहा है। साथ ही कहेंगे कि इसके तरीके में थोड़ा बदलाव करवाया जाए, ताकि लोगों की आवाजाही नहीं रुके।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि केंद्र सरकार और किसानों को बात करनी चाहिए। हम एक निष्पक्ष और स्वतंत्र कमेटी बनाने पर विचार कर रहे हैं, जो दोनों पक्षों की बात सुनेगी। तब तक अहिंसक रूप से आंदोलन चल सकता है।

इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि किसान इस कानून को रद्द करने को कह रहे हैं। वे हां या ना में जवाब मांग रहे हैं। उन्हें क्लॉज दर क्लॉज चर्चा करनी चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें नहीं लगता कि वे आपकी बात मानेंगे, इसलिए यह कमेटी को तय करने दीजिए।

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सड़क की नाकाबंदी अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है। आंदोलन करने वालों में कोई भी मास्क नहीं पहन रहा है। वे बड़ी भीड़ में बैठते हैं। जब वे अपने गांवों में वापस जाएंगे, तो कोविड को पूरे भारत में फैला देंगे। किसान दूसरे के फंडामेंटल राइट्स का वॉयलेशन नहीं कर सकते। किसान कह रहे हैं कि वे छह महीने की तैयारी के साथ आए हैं। यह तो सिर्फ युद्ध के समय होता है।

इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या किसी ने कहा कि वे रोड ब्लॉक करेंगे? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि टिकरी बॉर्डर बंद है। नोएडा को जाने वाले रास्ते को ब्लॉक करने की बात कही गई है।

इस पर पंजाब सरकार की ओर से पी. चिदंबरम ने पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी किसान संगठन ने सड़क जाम करने की बात नहीं की है। प्रशासन द्वारा रास्ते बंद किए गए हैं।

अपनी मांगों को लेकर किसान पिछले 23 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें सड़कों से हटाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।

चीफ जस्टिस ने केंद्र से विवादित कृषि कानूनों को होल्ड पर रखने के लिए विचार करने को कहा। लेकिन सरकार की ओर से कहा गया कि यह नहीं किया जा सकता। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि जल्दबाजी न करें, और कृपया सुझाव पर विचार करें।

सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन को लेकर कोई फैसला नहीं सुनाया है और सुनवाई अगली तारीख तक टाल दी है। अदालत में किसी किसान संगठन के ना होने के कारण कमेटी पर फैसला नहीं हो पाया। कोर्ट का कहना है कि वो किसानों से बात करके ही अपना फैसला सुनाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में सर्दियों की छुट्टी हैं, ऐसे में आगे इस मामले की सुनवाई वैकेशन बेंच करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related

इंसानियत के लिए डरावनी है यूएन की ताजा जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट

Post Views: 166 संयुक्त राष्ट्र की जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार अगले 20 साल में दुनिया के तापमान में 1.5 डिग्री सेल्शियस इजाफा तय है, ग्लोबल वार्मिंग की इस रफ्तार पर भारत में चरम गर्म मौसम की आवृत्ति में वृद्धि की उम्मीद। ● जनपथ धरती की सम्‍पूर्ण जलवायु प्रणाली के हर क्षेत्र में पर्यावरण में […]

पेगासस जासूसी और भारतीय लोकतंत्र के इम्तिहान की घड़ी

Post Views: 153 ● एमके वेणु जब सरकारें यह दिखावा करती हैं कि वे बड़े पैमाने पर हो रही ग़ैर क़ानूनी हैकिंग के बारे में कुछ नहीं जानती हैं, तब वे वास्तव में लोकतंत्र की हैकिंग कर रही होती हैं। इसे रोकने के लिए एक एंटीवायरस की सख़्त ज़रूरत होती है। हमें लगातार बोलते रहना […]

पंजाबी गीतों में किसान आंदोलन की गूंज

Post Views: 240 नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बैठे किसानों को पंजाब के गायकों का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। नवंबर के अंत से जनवरी के पहले सप्ताह तक विभिन्न गायकों के दो सौ अधिक ऐसे गीत आ चुके हैं, जो किसानों के आंदोलन पर आधारित हैं। कंवल ग्रेवाल और हर्फ चीमा की नई […]

error: Content is protected !!
Designed and Developed by CodesGesture