अभी भी समय, चेतिये और लोकतंत्र को सही ढंग से समझिये

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अभी मोदी सरकार जो जो कर रही है इसी काम के लिए तो वह 1925 पैदा हुई। आज भी वह आपको मदद कर रही है कि आप लोकतंत्र को सही ढंग से समझें और चेतें। मोदी सरकार ने कब यह कहा था कि हम किसान के पक्षधर हैं? वे जबरन संसद में अपने से नही गए हैं, आपने ही भेजा है। संसद उनके कब्जे में है। आपके पास सड़क है और अदालत है। अपने चुने हुए प्रतिनिधि पर दबाव डालो कि वे इस कानून के खिलाफ खड़े हों और वाजिब तर्क के साथ अपनी कुर्सी से हट जाँय।

• चंचल बीएचयू

चंचल बीएचयू काशी हिंदू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।

मोदी सरकार अपने उसूल पर कायम है, आप उसे दोष क्यों दे रहे हैं? अभी मोदी सरकार जो जो कर रही है इसी काम के लिए तो वह 1925 पैदा हुई। आज भी वह आपको मदद कर रही है कि आप लोकतंत्र को सही ढंग से समझें और चेतें। मोदी सरकार ने कब यह कहा था कि हम किसान के पक्षधर हैं? वह तो 52 से ही चीख रहे हैं- हमें जिताओ, हम जमींदारी लागू करेंगे। आज खुल्लम खुल्ला जमींदारी व्यवस्था लागू कर दी गयी तो इसके जिम्मेदार आप हैं। वे जबरन संसद में अपने से नही गए हैं, आपने ही भेजा है। तब तो आपको पंद्रह लाख रुपया दिख रहा था, आंख बंद करके मुफ्त में आती रकम दिख रही थी, ‘अच्छे दिन’ दिख रहे थे।

आज मोदी सरकार आपको सिखा रही है, कमबख्त! बाजार से पाव भर भिंडी खरीदोगे तो तीन बार उलट पुलट कर देखोगे, कौन बेच रहा है किस जाति का है उसे नही देखोगे, निगाह भिंडी पर रहेगी और वोट देते समय? सन्दूक बंदूक रुतबा रुआब देखोगे। तो संसद में कौन जायगा?

लेकिन अब जमींदारी नही चलेगी, नए जमींदार नही चल पाएंगे। खटकाओ दरवाजा न्यायालय का। तुम्हारे अधिकार में कटौती ही नही हो रही उसे समाप्त किया जा रहा है। सबसे ज्यादा और बड़ी चुनौती तो अदालत को मिल रही है, अदालत आंख बंद किये बैठी है। नया किसान कानून कह रहा है- ‘किसान और किसान की जमीन लीज पर लेनेवाली पार्टी के बीच किसी भी तरह का विवाद न्यायालय नही जायगा इसका निस्तारण छोटा कलेट्टर या जिला कलेट्टर ही कर सकेगा’। सब जानते है, कलेट्टर या नौकरशाही किसके इशारे पर नाचती है?  अदालत के दायरे को कम करने का अधिकार किसने दिया? अदालत खामोश क्यों है?

संसद उनके कब्जे में है। आपके पास सड़क है और अदालत है। अपने चुने हुए प्रतिनिधि पर दबाव डालो कि वे इस कानून के खिलाफ खड़े हों और वाजिब तर्क के साथ अपनी कुर्सी से हट जाँय।

माननीय अदालत ! किसान के साथ साथ आपकी भी सीमा बन्द की जा रही है, न्यायपालिका पर चोट है आप संज्ञान में लें।

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