सोशल मीडिया पर ताक़तवर बीजेपी के यूट्यूब वीडियो पर लगातार डिसलाइक क्यों?
सोशल मीडिया की बादशाह कही जाने वाली बीजेपी इन दिनों बेहद ख़राब दौर से गुजर रही है। माना जाता है कि वर्ष 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को सत्ता में स्थापित करने में सोशल मीडिया की बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बीते संसदीय चुनाव में भी सोशल मीडिया बीजेपी का खास हथियार रहा है। लेकिन लगता है अब समय पलट गया है। हाल के दिनों में अपने यूट्यूब चैनल पर बीजेपी कमज़ोर दिखने लगी है।
- विवेक श्रीवास्तव/ डॉ प्रमोद शुक्ल
कई फ़ेसबुक पेज और कई ट्विटर हैंडल चलाने वाली बीजेपी को हप्ते भर के भीतर यू ट्यूब पर उसके वीडियो को मिले डिसलाइक्स ने खासा परेशान किया हुआ है। कोई भी वीडियो प्रकाशित होते ही नापसंद करने वालों की संख्या ज़्यादा क्यों हो जा रही है? ये वीडियो भी किसी छोटे-मोटे नेता के भाषण या कार्यक्रम के नहीं हैं, इनमें प्रधानमंत्री मोदी से लेकर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के स्टार प्रवक्ता तक के हैं। इनमें वे वीडियो भी शामिल हैं जिनमें सरकार की नीतियों की सफलता का बखान किया गया है। अब स्थिति तो ऐसी है कि कई वीडियो में यह तक नहीं दिख रहा है कि कितने लाइक और डिसलाइक किए गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इन डिसलाइक्स को लेकर जोरदार चर्चा भी है।
कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को बीजेपी के यू ट्यूब चैनल पर लगभग डेढ़ लाख लाइक मिले थे। लाइक्स की ये संख्या वैसे ही कम थी लेकिन बीजेपी के माथे पर चिंता की लकीरें खिचीं उसी वीडियो को मिले लगभग साढ़े 8 लाख से ज़्यादा डिसलाइक देखकर। सोशल मीडिया पर इसे लेकर खूब चर्चा हुई और मीम बने। इस वीडियो को डिसलाइक करने वालों की संख्या अब तक 12 लाख से ज़्यादा पहुंच गई है। जबकि लाइक करने वालों की संख्या क़रीब साढ़े चार लाख ही है। इस वीडियो को देखने वालों की संख्या 74 लाख से ज़्यादा हो गई है। अब बीजेपी के ही यू ट्यूब चैनल पर फिर से कुछ ऐसा ही हुआ है और पार्टी परेशान है कि आख़िर वह करे तो करे क्या।
4 सितंबर को बीजेपी के यू ट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया गया। लोगों को वीडियो की ओर खींचने के लिए वीडियो की शुरूआत एक इमेज से की गयी, जिसमें लिखा है- कोरोना महामारी में देश वासियों के साथ हर क़दम पर खड़ी मोदी सरकार, इसमें मोदी जी का फ़ोटो भी है। इसके टाइटल में भी यही वाक्य लिखा गया है।
डिस्क्रिप्शन को कैची बनाने के लिए लिखा गया है- ‘ग़रीबी में जीने वाला ही जान सकता है ग़रीबों की पीड़ा।’ इसके अलावा ग़रीबों को मुफ्त राशन, मुफ्त गैस सिलेंडर, जनधन खाते में 500-500 रुपये, अतिरिक्त वृद्धावस्था व विकलांग पेंशन सहित तमाम कामों का जिक्र किया गया है और हैशटैग दिया गया है- आत्मनिर्भर भारत।

वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शान में कसीदे पढ़ते हुए एक बुजुर्ग महिला को एक दुकानदार से यह कहते हुए दिखाया गया है कि वह उसे मुफ़्त राशन दे दे। बुजुर्ग महिला कहती है, ‘तीन महीने से मेरे घर का चूल्हा मोदी जी के कारण जल रहा है, हम ग़रीबों को मोदी जी कब तक झेलेंगे।’ इस पर दुकानदार कहता है- ‘जो ख़ुद ग़रीब परिवार से आया हो, वह किसी को झेलता नहीं है, दूसरों का सहारा बनता है।’
आगे भी इसी तरह के वाक्यों से मोदी जी को ग़रीबों का मसीहा बताया गया है। वीडियो अपलोड करते समय बीजेपी की आईटी टीम को उम्मीद रही होगी कि यह वीडियो काफ़ी लोगों को पसंद आएगा लेकिन थोड़ी देर बाद ही बीजेेपी की ये उम्मीद धुलधूसरित होती दिखी।
इस वीडियो के साथ भी वही हुआ, जो ‘मन की बात’ वाले कार्यक्रम के वीडियो के साथ हुआ था। 5 सितंबर सुबह के 11 बजे तक इस वीडियो को 2700 लाइक के बजाय 16 हज़ार डिसलाइक मिल चुके थे।
कल ही जब बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा झारखंड में ली गई राज्य की पार्टी कार्यकारिणी की बैठक के वीडियो को क़रीब एक घंटे में ही 12 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने नापसंद कर दिया था। क़रीब 1.5 हजार लोगों ने इसे पसंद किया। यह आँकड़ा तब का है जब इस वीडियो को क़रीब साढ़े 15 हज़ार लोगों ने देखा था।
पहले लोगों को लगा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह वीडियो लोगों को पसंद नहीं आया इसलिए ऐसा किया गया। इसके लिए कहा गया कि NEET और JEE जैसी परीक्षाओं को लेकर और उसका ज़िक्र नहीं किए जाने से युवाओं में नाराज़गी थी और इसी की प्रतिक्रिया में लोगों ने उस वीडियो को नापसंद किया। लेकिन स्थिति इससे कहीं आगे बढ़कर है। पिछले हफ़्ते के बाद जितने भी वीडियो आए हैं उनमें से अधिकतर में डिसलाइक करने वालों की संख्या लाइक करने वालों से काफ़ी ज़्यादा हैं। बाक़ी के कुछ वीडियो में लाइक और डिसलाइक की संख्या ही नहीं दिख रही है।
बीजेपी के यूट्यूब चैनल पर सोमवार को प्रकाशित एक वीडियो पीएम मोदी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने का है। क़रीब 4 घंटे में इस वीडियो को 4 हज़ार लाइक के साथ 23 हज़ार से ज़्यादा डिसलाइक्स मिले हैं। दो दिन पहले रविवार को बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के वीडियो को 14 हज़ार लोगों ने नापसंद किया जबकि 5.3 हज़ार लोगों ने पसंद किया। पाँच सितंबर के प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो को 6.2 हज़ार लोगों ने नापसंद किया जबकि 4.2 हज़ार लोगों ने पसंद किया।
जेपी नड्डा द्वारा ओडिशा में ली गई राज्य पार्टी कार्यकारिणी की बैठक के पाँच सितंबर के वीडियो में लाइक और डिसलाइक करने वालों की संख्या नहीं दिख रही है।
4 सितंबर को आईपीएस प्रोबेशन अधिकारियों के दीक्षांत परेड कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को बीजेपी के यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित किया गया और इसमें भी कोई लाइक और डिसलाइक नहीं दिख रहा है।
सोशल मीडिया पर आरोप लगाया जा रहा है कि इसे जानबूझकर दिखाया नहीं जा रहा है। हालाँकि, एक स्थिति यह भी हो सकती है कि इसे किसी ने लाइक या डिसलाइक नहीं किया हो, लेकिन बीजेपी यूट्यूब चैनल पर शायद ही कोई वीडियो हो जिसको लाइक और डिसलाइक नहीं मिला हो।
बीजेपी के लिए बना सिरदर्द
कुल मिलाकर यह बीजेपी के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है कि आख़िर ऐसा क्या हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यू ट्यूब पर लोगों ने नापसंद करना शुरू कर दिया है क्योंकि मोदी की लोकप्रियता नोटबंदी, जीएसटी, आर्थिक मंदी और कोरोना संकट में भी घटती नहीं दिख रही थी तो अब अचानक लोग डिसलाइक क्यों करने लगे हैं।
अब बीजेपी कैसे इस मुसीबत से निपटती है, ये देखने वाली बात होगी। क्योंकि बीजेपी सब कुछ कर सकती है लेकिन लोगों को वीडियो लाइक या डिसलाइक करने से नहीं रोक सकती।
