चीन ने भारत में बनाई सडक़!
उधर चीन ने भारतीय सीमा के भीतर लगभग 1 किलोमीटर लंबी सडक़ बना ली और इधर भारत सरकार अब से पांच साल पहले अहमदाबाद में चीनी राष्ट्रपति सी जिनपींग के साथ ‘झूले के आनन्द’ से अभी तक बाहर निकल ही नहीं सकी है। भारतीय सेना ने भाजपा सांसद तापिर गांव के इस दावे को भले ही खारिज कर दिया है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के चागलागाम और बिशिंग क्षेत्र में घुसपैठ किया था लेकिन विभिन्न स्रोतों से मिल रही जानकारी के अनुसार चीन बिशिंग, जो चागलागाम से 175 किलोमीटर दूर, ब्रह्मपुत्र क्षेत्र के पास है, क्षेत्र में घुसपैठ कर रहा है।
गूगल टूल के इस्तेमाल से मिली तस्वीर से पता चला है कि चीन द्वारा लाइन ऑफ कंट्रोल के आसपास के 1 किलोमीटर तक बनाई गई सडक़ दिबांग वन्यजीव अभ्यारण के समीप पूर्वी क्षेत्र में स्थित है। पूर्व से पश्चिम की ओर बन रही सडक़ भारतीय क्षेत्र में 942 मीटर भीतर बार्डर के समानांतर 300-400 मीटर तक बनी हुई है। काफी रोचक बात यह है कि इस ब्रह्मपुत्र क्षेत्र में जहां चीन सडक़ बना रहा है वहां 2 सैन्य बेस और 2 चेक प्वाइंट हैं।
सेटेलाइट फोटो से पता लग रहा है कि सडक़ चीन से भारत की ओर बन रही है। यहां नीले रंग की एक छत भी दिखी है जिससे प्रमाणित होता है कि चीन ने यहां कुछ निर्माण किया है। वह लगभग 1 किलोमीटर अंदर घुसकर भारी वाहनों के इस्तेमाल से निर्माण कर रहा है। भारत की धरती पर चीन के घुसपैठ की यह कोशिश साल 2017 के बाद से बड़े ही तरीके से हो रही है लेकिन भारत की तरफ से इस पर कोई भी आपत्ति नहीं जताई गई है।
क्या है जमीनी तथ्य?
जब बॉर्डर इलाका विवादित होता है तब उस क्षेत्र में कोई भी ढांचा खड़ा करना विवाद खड़ा कर देता है। मान लीजिए कि 2015 में चीन ने एलएसी को अपना बॉर्डर मान लिया। लेकिन तथ्य यह है कि उसके बाद चीन ने इस क्षेत्र में 1 किलोमीटर सडक़ बना ली थी। चीन का यह कदम साबित करता है कि वो बॉर्डर क्षेत्र को बढ़ाना चाहता है। ऐसे कदमों से सवाल खड़ा होता है कि जमीन पर इसका क्या प्रभाव होगा। इसका मतलब साफ है कि चीन यहां अपनी मौजूदगी से दक्षिणी क्षेत्र का पूर्वी-पश्चिमी क्षेत्र से संयोजन कर सकता है। वह पूरे ब्रह्मपुत्र क्षेत्र में निर्माण कार्य फैलाकर दक्षिणी क्षेत्र पर आधिपत्य जमाने की कोशिश कर रहा है।
