कॉरपोरेट स्टाइल स्मार्ट अस्पताल
ऐसे होगा स्मार्ट लुक
- फायर सुरक्षा के सारे इंतजाम होंगे। नए अग्निशमन यंत्र लगाए जाएंगे।
- सुरक्षा स्टाफ ट्रेंड होगा। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य इंतजाम तक किए जाएंगे।
- परिसर विस्तार और ओपीडी को मार्डन लुक दिया जाएगा। भवन अपग्रेडेशन।
- मेडिकल वेस्ट निपटारे के इंतजाम। बायो मेडिकल वेस्ट संग्रहण-निस्पादन।
- कलरफूल बेडशीट, दीवारों पर चित्रकला, विभिन्न वार्ड को बेहतर स्वरूप देना।
मध्य प्रदेश के जिला अस्पताल अब जल्द ही स्मार्ट लुक में नजर आएंगे। साफ-सफाई, मेंटनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याओं से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों को प्राईवेट अस्पतालों की तर्ज पर बेहतर बनाने के लिये कमलनाथ सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अस्पतालों का संचालन कॉरपोरेट स्टाइल में किया जाएगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है जो स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम करेगा। राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने मिलकर संयुक्त कार्ययोजना को मंजूरी दी है। अब दोनों विभाग एक्शन प्लान तैयार करेंगे।
राज्य के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही इस योजना की शुरुआत इंदौर और भोपाल के जिला अस्पतालों से हो रही है। इन जिला अस्पतालों का मौजूदा लुक अपग्रेड कर इन्हें स्मार्ट मॉडल पर लाया जाएगा। तय किया गया है अस्पताल भवनों के प्राचीन डिजाइन को कायम रखते हुए आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। मुख्य द्वार और अन्य अटेंडेंट गेट को विकसित किया जाएगा। सभी सेवाओं के लिए सरकारी मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। मरीजों और उनके परिजनों से फीडबैक लिया जाएगा, ताकि कहीं पर खराब स्थिति होने पर एक्शन लिया जा सके।
किसकी क्या होगी जिम्मेदारी
नगरीय प्रशासन विभाग के पास साफ-सफाई, पानी, सुरक्षा और अधोसंरचना संबंधित अन्य काम आएंगे। इसमें साफ-सफाई, पानी, सुरक्षा, मरीज अटेंडेंस सिस्टम डेवलपमेंट, रैंप निर्माण, पार्किंग, मैनेजमेंट, परिसर विस्तार, वेटिंग रूम, वायो मेडिकल वेस्ट निपटारा व अन्य काम शामिल रहेंगे। जबकि चिकित्सक, चिकित्सा व जांच उपकरण, दवायें, अस्पताल प्रशासन व अन्य व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के पास ही रहेगा।

‘स्वास्थ्य मंत्री के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। जिला अस्पतालों को स्मार्ट बनाने का जिम्मा अब हम संभालेंगे। अस्पतालों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि इलाज के लिए किसी प्राइवेट अस्पताल की जगह लोग अब सरकारी अस्पताल को ज्यादा तरजीह दें।’
जयवर्धन सिंह, मंत्री नगरीय प्रशासन
