मिड डे मील में नमक-रोटी उजागर करने वाले पत्रकार पर मुकदमा
यूपी के पत्रकार इस बात से हैरत में है कि जिस मामले में जिलाधिकारी को तत्काल पद से हटा कर उनके खिलाफ भी मुकदमा होना चाहिये था उसी मामले में पिछले तीन दिन में ऐसा क्या हो गया कि डीएम पत्रकारों को ही यह समझाने लगे कि पत्रकार का क्या काम है?
- यशवंत कुमार पाण्डेय
मीरजापुर के सिऊर गांव में सरकारी प्राइमरी स्कूल के बच्चों को नमक-रोटी खिलाने के मामले में कलेक्टर अनुराग पटेल अपनी गर्दन बचाने के लिए पहले तो ऐसी किसी घटना से ही पलटी मार गए फिर इसी मामले में वीडियो रिपोर्ट बनाने वाले जनसंदेश टाइम्स के पत्रकार पवन जायसवाल के ही खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।
इस मामले में राज्य सरकार के एक मंत्री का बयान आया कि सरकार को बदनाम करने की कोशिश की गई, जबकि सच यह है कि पत्रकार की यह कोशिश सरकार को आगाह करने की है। सरकार को इस मुद्दे के बाद यह साफ करना चाहिये कि पत्रकार किस तरह से कवरेज करें। पत्रकार के खिलाफ मुकदमेे की एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा निंदा किए जाने और फिर स्थानीय पत्रकारों ने द्वारा विरोध जताये जाने पर डीएम अनुराग पटेल ने अजीबो-गरीब सफाई पेश की है! कलेक्टर ने कहा कि ‘प्रिंट के पत्रकार ने वीडियो क्यों बनाया’ वे पत्रकारों को ही समझाने लगे कि पत्रकारिता कैसे करनी है। कहा कि प्रिंट मीडिया का पत्रकार होने के बावजूद पत्रकार ने जिस तरह से वीडियो बनाकर उसे वायरल किया, उससे लगता है कि वो किसी साजिश में शामिल था। पटेल ने अपने दफ्तर में पत्रकारों को समझाना शुरू किया कि प्रिंट मीडिया के पत्रकार को क्या काम करना चाहिए और क्या नहीं।
मीरजापुर के सिऊर गांव के प्राथमिक विद्यालय में मिड डे मील में बच्चों के नमक रोटी खाने का वीडियो सोशल मीडया पर जोरदार ढंग से वायरल होने के बाद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार की खूब किरकिरी हो रही है। सरकार की फजीहत से नाराज जिला कलेक्टर ने घटना के बाद डीएम अनुराग पटेल ने दो अलग-अलग जांचें कराई थी, जिसके बाद इस मामले में एबीएसए बृजेश सिंह को निलंबित करने के साथ ही बीएसए को ट्रांसफर करने की शासन से सिफारिश करते हुए कार्यमुक्त भी कर दिया था। लेकिन बाद में घटना सामने लाने वाले पत्रकार पवन जायसवाल पर ही एफआईआर दर्ज करा दी। एफआईआर का विरोध दर्ज कराने गए पत्रकारों ने डीएम से पूछा कि पत्रकार खबर बनाने गया था तो वह दोषी कैसे हो गया? वह साजिशकर्ता कैसे हो गया? इस पर डीएम कहते हैं कि खबर बनाने का तरीका अलग होता है। आप प्रिंट मीडिया के पत्रकार हो तो आप फोटो खींच लेते, आप को जो गंभीरता लग रही थी, गलत हो रहा था, उसे आप छाप सकते थे, लेकिन उन्होंने (पत्रकार ने) ऐसा नहीं किया। इसलिए उनकी भूमिका संदिग्ध लगी और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि डीएम ने यह नहीं बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करना किस तरह से साजिश की श्रेणी में आता है। बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि अगर डीएम को यह लग रहा है कि यह घटना साजिश थी तो उस समय उन्हें कार्रवाई करने की क्या जरूरत थी।
यूपी सरकार का यह कदम ‘क्रूर’ : एडिटर्स गिल्ड
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने यूपी के मिर्जापुर के स्थानीय पत्रकार पवन जायसवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कड़ी निंदा की है। एडिटर्स गिल्ड ने पत्रकार के खिलाफ की गई कार्रवाई को पत्रकारों के खिलाफ उठाया गया क्रूर कदम बताया है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट शेखर गुप्ता, जनरल सेक्रटरी एके भट्टाचार्य और ट्रेजरार शीला भट्ट ने एक पत्र जारी कर यूपी सरकार के इस कदम को निंदनीय और क्रूर बताया है। साथ ही कहा कि लोकतांत्रिक समाज में निर्भीक पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है।
