मुश्किल में शिवराज
व्यापमं महाघोटाला
- विश्वविजय सिंह
मध्य प्रदेश का बहुचर्चित व्यापमं महाघोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। कमलनाथ सरकार 1200 से ज़्यादा शिकायतों की जांच करा रही है। अब तक हुई जांच के बाद खबर है कि करीब 100 एफआईआर दर्ज करायी जाएगी, जिसमें 500 लोगों के नाम हो सकते हैं। ये वो मामले हैं जिन्हें सीबीआई ने बिना जांच किए ही एसटीएफ को लौटा दिया था। एसटीएफ की राडार पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी सरकार में रहे कई मंत्री, आईएएस और आईपीएस अफसर हैं। व्यापमं घोटाले की जांच के वाादे के साथ सत्ता में आई कांग्रेस अब अपना वादा पूरा कर रही है। सरकार के निर्देश के बाद हरकत में आई एसटीएफ ने लम्बित शिकायतों की जांच तेज कर दी है। अब तक 1200 शिकायतों का वेरिफिकेशन किया जा चुका है। उसमें से 197 शिकायतों में बयान लिए जा रहे हैं। पूरे प्लान के तहत यह जांच चल रही है। एसटीएफ इसकी जद में आए लोगों के खिलाफ सबूत जुटा रही है।
‘व्यापमं’ का ‘व्यापक’ प्लान
197 पेंडिंग शिकायतों की जांच के उसके लिए भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में तीन एसआईटी बनायी गयी हैं, जिसे जिले के एसटीएफ एसपी लीड कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इनमें से करीब 100 ऐसी शिकायतें हैं, जिनमें एफआईआर करायी जा रही है, उनमें 500 लोगों को आरोपी बनाया जाएगा। सीबीआई ने वर्ष 2015 में व्यापमं घोटाले की जांच एसटीएफ से अपने हाथ में ली थी। उस दौरान सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला देकर सिर्फ उन मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी, जिनमें एफआईआर दर्ज थे। वर्ष 2014 से 2015 के बीच सामने आई 12 सौ से ज्यादा शिकायतों में एफआईआर नहीं हुई थी, उन्हें सीबीआई ने एसटीएफको वापस भेज दिया था। एसटीएफअब उन्हीं शिकायतों की जांच कर रही है।
इन पर कस सकता है शिकंजा
जांच के दौरान पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मंत्री जगदीश देवड़ा के साथ कई बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों पर शिकंजा कसा जा सकता है। सबसे पहले पीएमटी और प्री पीजी को लेकर हुई शिकायतों में एफआईआर दर्ज होगी। एसटीएफ सिर्फ पेंडिंग शिकायतों या फिर आने वाली नई शिकायतों पर जांच करेगा। कमलनाथ सरकार के इस फैसले से मध्य्यप्रदेश के उन हजाारों युवाओं के चेहरे पर खुशी देखी जा रही है जिनके सुनहरे भविष्य को व्यापमं महाघोटाले ने बदरंग कर दिया है।
क्या है व्यापमं घोटाला
मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) राज्य में कई प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए जिम्मेदार राज्य सरकार द्वारा गठित स्व. वित्तपोषित और स्वायत्त निकाय है, जो राज्य के शैक्षिक संस्थानों में तथा सरकारी नौकरियों में दाखिले और भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करता है। इन प्रवेश परीक्षाओं में तथा नौकरियों में अपात्र परीक्षार्थियों और उम्मीदवारों को बिचौलियों, उच्च पदस्थ अधिकारियों एवं राजनेताओं की मिलीभगत से रिश्वत के लेनदेन और भ्रष्टाचार के माध्यम से प्रवेश दिया गया एवं बड़े पैमाने पर अयोग्य लोगों की भर्तियां की गयी।
इंदौर पुलिस द्वारा वर्ष 2013 में 2009 की पीएमटी प्रवेश से जुड़े मामलों में 20 नकली अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी से इस घोटाले की व्यापकता सामने आई। इसके बाद एसटीएफ की जांच में कई नेताओं, नौकरशाहों, व्यापमं अधिकारियों, बिचौलियों और उम्मीदवारों की घोटाले में भागीदारी का पर्दाफाश हुआ। इस घोटाले में पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा सहित 2000 से अधिक लोगों की अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है।
दिग्विजय ने उठाया था मामला

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने व्यापमं घोटाले को उजागर किया। वह इसकी जांच कराने को लेकर लगातार लड़ते रहे। इस मामले को लेकर कोर्ट भी गए, तब जाकर सीबीआई जांच आरंभ हुई। विधानसभा चुनाव के पहले दिग्विजय सिंह ने इस मामले को खूब उठाया था। और सरकार बनने पर जांच कराकर दोषियों को जेल भेजने का जनता से वादा किया था।
