बदले की राजनीति
पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम और कर्नाटक के पूर्व मंत्री डीके शिवकुमार की गिरफ्तारी ने मोदी सरकार के मंसूबे पर सवाल खड़ा किया है। दोनों पर आर्थिक अपराध के आरोप मढक़र सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारी की गई है। दोनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के साथ ही लम्बे समय से भारतीय जनता पार्टी और उसके मातृ संगठन आरएसएस की नीतियों के विरोध में मुखर रहे हैं।
- मनोज कुमार सिंह

पिछले दिनों कांग्रेस के दो बड़े नेताओं पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम और कर्नाटक के पूर्व मंत्री डीके शिवकुमार की गिरफ्तारी ने मोदी सरकार के मंसूबे पर सवाल खड़ा किया है। दोनों पर आर्थिक अपराध के आरोप मढक़र सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारी की गई है। दोनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के साथ ही लम्बे समय से भारतीय जनता पार्टी और उसके मातृ संगठन आरएसएस की नीतियों के विरोध में मुखर रहे हैं।
इन पर लगे आरोपों की सच्चाई का पता तो जांच पूरी होने या कोर्ट का फैसला आने के बाद ही पता चलेगा लेकिन यह तय है कि इन गिरफ्तारियों के पीछे दूसरी वजहों की अपेक्षा ‘बदले की राजनीति’ ज्यादा है। कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के टाइमिंग को लेकर भी केंद्र सरकार सवालों से घिरी हुई है। गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब देश में अर्थव्यवस्था में आ रही सुस्ती को लेकर केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार चौतरफा घिरी हुई है।
ऐसे में बीजेपी को ‘मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने में नाकाम रही।’ इस हेडलाइन को लगातार बदलते रहने की जरूरत है। पहले यह कश्मीर था और अब चिदंबरम व डीके शिव कुमार, आगे दूसरे मुुुद्देे भी आएंगे। इससे जनता को लगातार यह भी याद दिलाया जा सकेगा कि देखो विपक्ष कितना भ्रष्ट, बिकाऊ और गुनहगार है। सरकार की कोशिश है कि हमारे दिमाग को बहुत सारी ऐसी चीजों से भर दे जो हमें कम से कम रौशनी में भी नजर आए और हम अर्थव्यवस्था के सामने जो बड़ी मुसीबत मुंह बाए खड़ी है उस पर कम से कम बातें हों।
क्या है आईएनएक्स मामला
चिदंबरम के खिलाफ ताजा मामला कानूनी से अधिक राजनीतिक है, यह तो स्पष्ट है। यूपीए-1 में चिदंबरम के वित्त मंत्री रहने के दौरान आईएनएक्स नाम की मीडिया कंपनी को 305 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की अनुमति की आवश्यकता थी। तब फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड को यह अनुमति देनी पड़ी। कथित तौर पर कंपनी ने अनुमति के बगैर ही निवेश किया। आईएनएक्स कंपनी के मालिक इंद्राणी और पीटर मुखर्जी अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के अभियुक्त हैं और फिलहाल जेल में हैं। जेल में रहते हुए, इंद्राणी मुखर्जी ने कहा कि वे और उनके पति पीटर ने कानूनी पेंचीदगियों से बचने के लिए पी चिदंबरम को रिश्वत दी थी। जो रकम उन्होंने चिदंबरम के बेटे कार्ति को दी वो आश्चर्यजनक रूप से महज 10 लाख रुपये थे!
किस बात का बदला!
चिदंबरम गृह मंत्री थे, तब सीबीआई ने सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में हत्या के आरोप में गुजरात सरकार में तब के मंत्री अमित शाह को गिरफ्तार किया था। चिदंबरम ने न केवल मोदी के दाहिने हाथ माने जाने वाले अमित शाह के लिए परेशानी खड़ी की बल्कि सीधे तौर पर मोदी पर भी हाथ डाला। 2002 गुजरात दंगे की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही थी। आज अमित शाह गृह मंत्री हैं और पी चिदंबरम को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। वे गुजरात दंगों के मामले में अमित शाह को दोषी नहीं साबित कर पाने का खामियाजा भुगत रहे हैं।
कौन हैं चिदम्बरम
1954 में एक अमीर कारोबारी परिवार में जन्में चिदंबरम एक अच्छे प्रशासक और प्रतिष्ठित वकील हैं। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनावों में लोकसभा चुनाव जीत कर सांसद बने और राजीव गांधी की सरकार में उन्हें कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्री बनाया गया। यह चिदंबरम की प्रतिभा ही थी कि वे देवेगौड़ा और फिर इंद्रकुमार गुजराल के कैबिनेट में छोटे छोटे अंतराल के लिए मंत्री पद पाने में सफल रहे। फिर यूपीए-1 में वे वित्त मंत्री बने और 2004 से 2008 के बीच ग्रोथ और राजकोषीय घाटा दोनों का ख्याल रखने वाले बेहतरीन वित्त मंत्री रहे। 2008 में उन्हें गृह मंत्री बनाया गया। गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने आपरेशन ग्रीनहंट चलाकर माओवाद का सफाया किया। बाद में चिदंबरम जुलाई 2012 में दुबारा वित्तमन्त्री बने।
कौन हैं डीके शिव कुमार

कर्नाटक में पूर्ववर्ती कांग्रेस-जेडीएस और उससे पहले की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे डीके शिवकुमार के राजनीतिक कैरियर की शुरुआत साल 1985 में हुई जब उन्होंने बतौर कांग्रेस उम्मीदवार सथानूर (बैंगलोर ग्रामीण जिले से) से एचडी देवगौड़ा के खिलाफ चुनाव मे उतरे हालांकि तब वे देवेगौड़ा से हार गये। अगली बार कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो शिवकुमार ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव पर लड़ते हुए देवेगौड़ा को हरा कर इतिहास रच दिया। फिर दस साल बाद, शिवकुमार ने विधानसभा में देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी को हराया। उसके बाद उस समय की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल मचाते हुए उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में कनकपुरा लोकसभा सीट से अनुभवहीन तेजस्विनी को खड़ा कराकर देवगौड़ा को मात दी। लेकिन इसके बाद भी जब पार्टी ने जेडीएस और देवगौड़ा परिवार से हाथ मिलाकर कर्नाटक में गठबंधन सरकार बनाने का फैसला किया तो उन्होंने एक अनुशासित कार्यकर्ता की तरह पार्टी के फैसले को स्वीकार कर लिया।
किस बात का बदला!
डीकेएस के राजनीतिक करियर में गुजरात की एक राज्यसभा सीट के लिए हुआ चुनाव बेहद अहम है। मुकाबला था बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल के बीच। कांग्रेस के विधायक एक-एक कर भाजपा में शामिल होते जा रहे थे और अहमद पटेल की नैया मझधार में फंसने लगी थी तब कांग्रेस के बचे 44 विधायकों को बैंगलुरु के पास डीकेएस के ‘ईगलटन’ रिजॉर्ट ले जाया गया, जिसके बाद अहमद पटेल चुनाव जीत गए। ये डीकेएस का गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान देश के दूसरे सबसे शक्तिशाली राजनेता और तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी से सीधा-सीधा पंगा था। सभी को मालूम था कि वो बहुत बड़ा जोखिम उठा रहे हैं और इसका भुगतान उन्हें करना पड़ेगा। इसके बाद ही उनके खिलाफ आयकर विभाग के छापे पड़े और अब उनकी इस गिरफ्तारी को उन्हीं छापों की परिणति माना जा रहा है।
पिछले साल हुए विधान सभा चुनावों के बाद येदियुरप्पा ने 17 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। भाजपा के पास 104 सीटें थीं जबकि बहुमत का आंकड़ा 112 था। तमाम कोशिशों के बाद भी भाजपा बहुमत नहीं जुटा सकी। येदियुरप्पा ने बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस की तरफ से विधायकों को एकजुट रखने की पूरी जिम्मेदारी कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के हाथों मे ही थी।
मामला -1- पहले भी डीकेएस और उनका रिजॉर्ट कांग्रेस के लिए कई बार सेवियर बन के आया है। 2002 में जब महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख की सरकार पर खतरा आया तब वहां के विधायकों को कांग्रेस शासित कर्नाटक के इसी रिजार्ट में भेजा गया था जिसके बाद विलासराव देशमुख की सरकार बच गई थी।
मामला -2- इस बार फिर से डीकेएस का ईगलटन रिज़ॉर्ट कांग्रेस के लिए लकी साबित हुआ। कांग्रेस के सभी विधायकों को यहीं रखा गया था। जब विधायकों को बस से हैदराबाद ले जाया गया तो उस बस में सबसे आगे डीकेएस खुद बैठे थे।
क्या है मामला
यह मामला 8.33 करोड़ रुपये का है। यह रकम आयकर विभाग के अधिकारियों को कथित तौर पर दिल्ली के उस अपार्टमेंट से मिली थी जहां शिवकुमार रुके हुए थे। हालांकि शिवकुमार का कहना है कि उनका इन पैसों से कोई लेना-देना नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय ने आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर केस रजिस्टर किया है। आयकर विभाग ने कार्रवाई शुरू की थी लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।
एजेंसियों और सत्ता समर्थक मीडिया का सहारा ले सरकार विपक्ष को निशाना बना रही है : राहुल गांधी

पहले पी चिदंबरम की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी और अब कर्नाटक के पूर्व मंत्री डीके शिवकुमार की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार जांच एजेंसियों और सत्तापक्ष के साथ मिले हुए मीडिया का इस्तेमाल करके विपक्ष के लोगों को चुनिंदा ढंग से निशाना बना रही है।
