यूपी पुलिस ने सीधी रीढ़ वाले अफसर से मुक्ति पा ली!

अपने पूरे कार्यकाल में गुंडों-माफियाओं, नेताओं और सरकारों से कायदा कानूनों व नैतिकता के सवाल पर टकराते रहने वाले यूपी कैडर के आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को लोकहित के लिए सेवानिवृत्ति यानी जबरन रिटायरमेंट दे दिया गया। माना जाता है कि ठाकुर, पुलिस महकमें में सीधी रीढ़ वाले कुछेक बचे अफसरों में एक थे। उनकी जबरन […]

लौट आयी है अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” की नीति!

देश में पिछले कुछ बरस में धार्मिक, सामाजिक, पेशागत आधार पर जबरदस्त वर्गीकरण देखने को मिला है। सरकार के नीतियों और कार्यपद्धति को लेकर समाज के सभी तबकों के भीतर से समय समय पर विरोध के तीव्र स्वर उठते रहते हैं लेकिन सरकार के विरोध में रहने के बावजूद कोई एक वर्ग, दूसरे वर्ग का साथ […]

दिल्ली ने दिल्ली को दिल्ली बनने से रोकने के लिए दिल्ली के ऊपर एक दिल्ली बिठा दी!

● रवीश कुमार “दिल्ली के पीछे एक दिल्ली, दिल्ली के आगे एक दिल्ली, बोलो कितनी दिल्ली। आगे आगे दिल्ली, पीछे पीछे दिल्ली, पीछे पीछे दिल्ली, आगे आगे दिल्ली। भीगी दिल्ली भीगी बिल्ली, भीगी बिल्ली भीगी दिल्ली। दिल्ली के पीछे पड़ गई दिल्ली। इचक दिल्ली, बिचक दिल्ली, दिल्ली ऊपर दिल्ली, इचक दिल्ली। दिल्ली बन गई बिल्ली […]

आंदोलन उम्मीद जगाता है कि बैलों की तरह मनुष्य खेती से चुपचाप बेदखल नहीं किए जा सकते!

● हेमन्त कुमार झा कितने खूबसूरत लगते थे लंबी-लंबी सींगों वाले हृष्टपुष्ट बैल, जिन्हें अपने बथान की नादी में सिर-पूंछ हिलाते हुए खाते देख कर किसानों के मन में वैसा ही नेह उमड़ता था जो किसी अपने को देख कर होता है। वे प्यार से उनका नाम रखते थे…”मैना, करिया, हरिया। प्रेमचंद की ‘दो बैलों […]

स्वाधीनता संग्राम में कहीं नहीं था आरएसएस

● राम पुनियानी हमारे देश के सत्ताधारी दल भाजपा के पितृ संगठन आरएसएस के स्वाधीनता संग्राम में कोई हिस्सेदारी न करने पर चर्चा होती रही है। पिछले कुछ वर्षों में संघ की ताकत में आशातीत वृद्धि हुई है और इसके साथ ही इस संगठन के कर्ताधर्ताओं ने यह जताने के प्रयास भी तेज कर दिए […]

जंह जंह पांव पड़े कॉरपोरेट के, तंह तंह खेती बंटाढार

● बादल सरोज सार रूप में कहानी यह है कि आधी रात में अलाने की भैंस बीमार पड़ी। बीमारी समझ ही नहीं आ रही थी। उन्हें किसी ने बताया कि ठीक यही बीमारी गाँव के फलाने की भैंस को भी हुयी थी। वे दौड़े-दौड़े उनके पास गए और वो दवा पूछकर आये, जो उन्होंने अपनी […]

स्कैनिया के घोटाले से संबंधित उद्योगपति रूपचंद वैद निकला पीएम मोदी का करीबी

इन दिनों स्कैनिया बस घोटाले की खूब चर्चा है जिसमें केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का नाम लिया जा रहा है। लेकिन भारतीय मीडिया इस घोटाले के असल मास्टरमाइंड और लाभार्थी का नाम बहुत चालाकी से छिपा ले जा रही है। इस मामले की परत दर परत खोल रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मालवीय। ● गिरीश मालवीय यह […]

राष्ट्रीय समस्या और रिश्तेदार: व्हाट्स एप ग्रुप का राजनैतिक अवलोकन

● रवीश कुमार  भारत में इस विषय पर रिसर्च किए जाने की बहुत ज़रूरत है। कई लोग मुझे लिखते हैं कि व्हाट्स एप ग्रुप में रिश्तेदारों से बहस करना मुश्किल हो गया है। वो इतनी सांप्रदायिक बातें करते हैं कि उनसे बहस करना मुश्किल हो गया है। ये रिश्तेदार अपनी मूर्खता को लेकर इतने उग्र […]

सब कुछ एक जैसा ही क्यों हो!

इस देश की प्रकृति में कहीं भी एकरूपता नहीं है। उत्तर में पहाड़ हैं, पश्चिम में रेगिस्तान, दक्षिण में समुद्र है और पूर्व तक फैला विशाल उपजाऊ मैदान। सैकड़ों दो-आबे हैं। यहाँ हर एक की आस्था भिन्न है, बोली अलग है और कई बार तो परस्पर विपरीत भी है। तब कैसे किसी एक सार्वभौमिक संस्कृति की बात […]

एक शताब्दी पहले के मुजारा आंदोलन में अपनी जड़े तलाशता मौजूदा किसान आंदोलन

● संगीत तूर “मुजारों ने बिस्वेदरी प्रणाली के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मौजूदा आंदोलन कारपोरेट पूंजीवाद के खिलाफ है,” पंजाब के मनसा जिले के बीर खुर्द के किसान किरपाल सिंह बीर ने मुझे बताया। 1920 के दशक में जब पंजाब का बंटवारा नहीं हुआ था, पट्टेदार किसानों ने राजाओं, जमींदारों और ब्रिटिश अधिकारियों से भूमि स्वामित्व […]

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