बगावत

मुझे गुनहगार साबित कर दें, ये आपकी अदालत है,अगर ऐसा आप करते हैं, तो ये आपकी जहालत है। मुझे इल्म है कि आपकी कलम अब दबाव में रहती है, अगर ऐसा है तो यह सच के साथ खिलाफत है। मेरा हाकिम अब हिटलर बनना चाहता है,अगर ऐसा है, तो मेरे हाकिम तुझ पे लानत है। […]

कविता के रंग

वेद प्रकाश कविता अपने जन्म से ही मन को आंदोलित करती रही है । वैसे, कविता मूलत: लोग गीत को ही आज भी मानते हैं । कविता गीत का रूप हो सकती है, लेकिन, जब केवल कविता की बात होगी तो, उसमें हमारे ऊबड़-खाबड़ हिस्से शामिल हो जाते हैं। मैं इसकी शुरूआत धूमिल से ही […]

आवारा भीड़ के खतरे

यह नया हिंदुस्तान है जो इन दिनों माब लिन्चिंग (भीड़ हत्या) के खतरे से जूझ रहा है। यहां भीड़ किसी को मारकर मुर्दा बना देती है। कभी गोरक्षा के नाम पर तो कभी धर्म या सम्प्रदाय के नाम पर। फिर मुर्दे पर मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है और हत्या के आरोपियों को छोड़ दिया […]

मैं नीर भरी दु:ख की बदली

महादेवी वर्मा की जयंती पर विशेष ‘मैं नीर भरी दु:ख की बदली’ ही परिचय का पर्याय है हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सर्वकालिक कवियित्री महादेवी वर्मा का, जो उन्होंने स्वयं अपनी कविता में दिया है। इसी एक पंक्ति को मन में रखे हुए आप उनके सम्पूर्ण काव्य-साहित्य का […]

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