हमें उन्माद से बाहर निकलना होगा

आपको सिखाया जा रहा है कि भारतीय राष्ट्र पर भरोसा मत कीजिए। किसी कठमुल्ले पर भरोसा कीजिए। आईएसआईएस और तालिबान भी अपने लोगों को ऐसे ही बरगलाता है कि हमारे धर्म पर खतरा है, हथियार उठा । डर फैलाने वाले भारतीयता के दुश्मन हैं। वे आपको बता रहे हैं कि देश की पुलिस और सुरक्षा […]

मंदी और नेहरूफोबिया

हालिया वर्षों में ऐसा क्या हो गया कि कुछ साल पहले तक तकनीक में आगे बढऩे के सपने देखने वाला युवा अब गोबर और गोमूत्र के सहारे विश्वगुरू बनने के सपने देखते हुए हर फेक न्यूज़ पर यकीन कर रहा है। वह इस कदर दिग्भ्रमित कैसे हो गया? क्या होगा आनेवाले सालों में, जब यही […]

‘गांधी’ से संवाद करिए…

सत्य, अहिंसा और प्रेम नामक अस्त्र का प्रयोग वही कर सकता है जो निर्भय हो, निस्वार्थ हो। गांधी ने 1917 में चम्पारण से 30 जनवरी 1948, बिड़ला भवन तक अपने कार्यों से, जीवनचर्या से ये दोनों बातें स्थापित कीं। गांधी के आन्दोलन में न कहीं लाठी चली न बन्दूक, न किसी को लम्बा जेल भुगतना […]

दो राहे पर हिन्दुस्तान

हिन्दुस्तान आज एक दोराहे पर खड़ा है। एक ओर साझी संस्कृति का वह रास्ता है जिसे स्वाधीनता संग्राम के शहीदों ने अपनी शहादत से सींचा है तो दूसरी ओर सांप्रदायिकता और धार्मिक उन्माद का वह रास्ता है जिसके तहत युवकों को भ्रमित किया जा रहा है कि दूसरे समुदाय के धर्मस्थल पर कुछ हथौड़े चला […]

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