न बैंक खाता, न ही पंजीकरण फिर आरएसएस ने कैसे की महामारी में इतनी धन उगाही?

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● पूर्वा स्टार ब्यूरो

नागपुर। नागपुर के एक कार्यकर्ता मोहनीश जबलपुरे ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर (आईटी) विभाग को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज़ करके संगठन के धन के स्रोत की जांच की मांग की है।

गौरतलब है कि पिछले साल जून में आरएसएस ने दावा किया था कि उसने 10 मिलियन लोगों को राशन प्रदान किया, 70 मिलियन लोगों को भोजन के पैकेट वितरित किए और 27 लाख प्रवासी मजदूरों को वित्तीय और अन्य प्रकार की सहायता प्रदान की है। आरएसएस के उपरोक्त दावों का हवाला देते हुये शिक़ायतकर्ता मोहनीश जबलपुरे ने यह जानने की कोशिश की कि आरएसएस कैसे बड़ी मात्रा में धन उत्पन्न करने में कामयाब रहा।

‘जनचौक’ के मुताबिक शिक़ायतकर्ता मोहनीश जबलपुरे ने शुरुआत में स्थानीय चैरिटी कमिश्नर और मुख्यमंत्री सचिवालय में शिक़ायत दर्ज़ करायी थी। जिसके जवाब में असमर्थता जताते हुये स्थानीय चैरिटी कमिश्नर ने कहा था कि दक्षिणपंथी संगठन (आरएसएस) एक पंजीकृत संस्था नहीं है इसलिए, वह कोई कार्रवाई शुरू करने में असमर्थ है।

इसके बाद शिक़ायतकर्ता मोहनीश जबलपुरे ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर (आईटी) विभाग को 21 सितंबर को लिखे पत्र में पूछा है – “चूंकि आरएसएस के पास कोई बैंक खाता नहीं है क्योंकि यह एक पंजीकृत संगठन नहीं है, इसने महामारी के दौरान इतनी बड़ी राशि कैसे उत्पन्न की …?”

आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी अरविंद कुकडे ने हिंदुस्तान टाइम्स को प्रतिक्रिया देते हुये कहा है कि जब भी कोई समन मिलेगा संगठन जवाब देगा। “हमारा संगठन देश के कानून में विश्वास करता है।”

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