देश में एक राष्ट्रीय वैक्सीनेशन आयोग बने

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● अपूर्व भारद्वाज

क्या कोरोना की तीसरी लहर बरसाएगी कहर? यह प्रश्न इस मानसून में हर भारतीय के मन मे अजीब सा डर पैदा कर रहा होगा औऱ यह होना लाजिमी भी है। क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर ने जो कहर बरपाया है वो हर भारतीय को सशंकित कर गया है। वो बार बार हर विशेषज्ञ से यही पूछ रहा है कि क्या कोरोना की तीसरी लहर आएगी? अगर आएगी तो इसका कितना असर होगा?

इन दो महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर केवल आपको डेटा ही दे सकता है। पहले प्रश्न का उत्तर है- हां, तीसरी लहर बिलकुल आ सकती है औऱ दूसरे का प्रश्न का उत्तर वैक्सीनेशन में छुपा है। लेटेस्ट डाटा के हिसाब से चीन में 95 करोड़ लोगों को वेक्सीन लग चुकी है जबकि भारत में यह संख्या 26 करोड़ तक ही पहुँची है। चीन 43% जनता को सिंगल डोज लगा चुका है जबकि भारत मे यह आंकड़ा केवल 15% तक ही पहुँचा है। अमेरिका और यूके में यह दर लगभग 45% है। इसलिए इन देशों मे भारत की तुलना में तीसरी लहर का असर कम होगा।

अगर पूरे विश्व के डाटा का विश्लेषण करें तो हम कह सकते है कि तीसरी लहर आएगी लेकिन इसका असर और काल बहुत छोटा होगा। यह अधिक से अधिक 10-15 दिन अपने चरम पर रहेगी।

भारत में जिस डेल्टा वेरियंट ने कहर मचाया था वो अमेरिका और लंदन में इतना असर नही दिखा पा रहा है। अमेरिका औऱ यूके के जिन इलाकों में 90 प्रतिशत वैक्सीनेशन हो चुका है वो डेटा मॉडलिंग और मॉनिटरिंग के आधार पर तीसरी लहर के कहर से बच सकते है।

भारत को अगर तीसरी लहर से बचना है तो उसे सबसे पहले एक नेशनल वैक्सीन एजेंसी के गठन की आवश्यकता है।

क्योंकि कोरोना का वैक्सीनेशन एक सतत चलने वाला दीर्घकालिक कार्यक्रम है। इसे मॉनिटरिंग करने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी की सख्त आवश्यकता है। कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए सरकार को कुुुछ सुझावों पर अमल करना चाहिए। इनमें से कई सुझाव पहले ही सरकार को लिख चुका हूँ और सरकार उनमें से कुछ मान भी चुकी है। लेकिन सरकार को अभी बहुत लंबा सफर तय करना है।

क्या करे सरकार

● सबसे पहले निःशुल्क और 24×7 वैक्सीनेशन शुरू कीजिए, अगर इस बीच तीसरी लहर आ भी जाए तो पूरे देश मे एक महीने का नेशनल लाकडाऊन लगा कर सारे काम रोककर वैक्सीन लगाएं। फंड की कमी को विस्टा प्रोजेक्ट जैसे फिजूल खर्ची को रोककर भी पूरा किया जा सकता है।

● अभी फिलहाल 7 करोड़/महीने वैक्सीन प्रोडक्शन की कैपिसिटी है। जब तक आप दूसरे वैक्सीन का प्रोक्योरमेंट करे जितनी भी वैक्सीन उपलब्ध है उससे पहले जिन राज्यों में सबसे ज्यादा संक्रमण है उन्हें वेक्सीनेट करे।

● अब उपलब्ध वैक्सीन को कैसे दिन मैनेज करे वो भी समझा देते हैं। जिन लोगों कोरोना हो गया है वो अगले 3 महीने तक सेफ है उन्हें छोड़ दीजिए, जो 15 प्रतिशत एक डोज लगवा चुके है उन्हें भी 4 महीने तक स्किप करे, इससे आपके पास कुछ दिन की व्यवस्था तो हो ही जाएगी।

● वैक्सीन का मास प्रोडक्शन करें। सारी आइपी औऱ लायसेंस निरस्त करके यह काम शीघ्र में शुरू कर दीजिए। विदेशी वैक्सीन निर्माता को दूसरी सारी अन्य वेक्सीन पर सब्सिडी दीजिये उनको भारत का बड़ा बाजार दिखा कर तत्काल वेक्सीन का प्रोक्योरमेंट करे।

● वैक्सीन उपलब्धता के बाद नया वैक्सीन सिस्टम बनाएं। एक टास्क फोर्स बनाएं, जिसमें केवल डाक्टर और वैज्ञानिक शामिल हों। सारे तकनीक रजिस्ट्रेशन औऱ फार्मेलिटी बंद करके आधार बेस्ट मॉनिटरिंग सिस्टम बनाएं।

● वैक्सीन रेगिस्तान में पानी की तरह होना चाहिए। वेस्ट बिलकुल नही होना चाहिए। केरल का मॉडल अपनाएं, एक वायल खराब होना भी अपराध माना जाए। वेस्टेज रेट 0.002 ही होना चाहिए जो अधिकारी औऱ सरकार इसका पालन न करे उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

● जनता को रोज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सही आँकड़े बताएं। पारदर्शिता और अनुशासन से यह सिस्टम बनेगा इसलिए सरकार विज्ञापन न करे केवल काम पर फोकस करे।

● रेंडम सेम्पलिंग और स्पॉट वैक्सीनेशन प्रोगाम को आजमाएं।

● बच्चों की वैक्सीनेशन के रिसर्च और ट्रायल को युद्ध स्तर पर करें। अमेरिका और अन्य देशों में यह काम अभी अंतिम चरण में है। अगर हम स्वदेशी वैक्सीन न बना पाए तो उनकी वेक्सीन का ट्रायल यहाँ भी संपन्न करवाये जा सकते है।

सरकार को अगर इस देश की जनता को दूसरी लहर के कहर से बचाना है तो स्वास्थ्य को कुछ समय के लिए व्यापार की कैटेगरी से सेवा में परिवर्तित कर देना चाहिए। किसी भी लोककल्याण राज्य के नागरिकों के लिए केवल शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय निःशुल्क होना चाहिए। लेकिन हमारे देश मे यही सबसे ज्यादा मंहगी है। याद रखिये जहां सेवा होती है वहां व्यापार नही होता है। और व्यापार में सेवा का दावा करने वाले सबसे बड़े ढोंगी है। आज की तारीख में वैक्सीनेशन सबसे बड़ी राष्ट्रसेवा है औऱ सरकार को इससे बिलकुल पीछे नही हटना चाहिए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और डाटा विशेषज्ञ हैं।)

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