चीन-गुजरात-पीएम केयर फंड और आईटी सेल!

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आज कल एक नया ट्रेंड चला है कि जो भी पार्टियां, नेता या व्यक्ति सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं उन्हें सत्तारूढ़ दल और उसके समर्थकों द्वारा फौरन ही वामपंथी, चीनी दलाल आदि घोषित कर दिया जाता है। जबकि इसके उलट सच्चाई ये है कि बीजेपी और उसके नेताओं के चीन से पुराने संबंध हैं और इन्हीं सम्बंधों की वजह से चीनी कम्पनियों ने सर्वाधिक निवेश भी गुजरात में ही किया है।

● पवन सिंह

भाजपा आईटी सेल विश्व की एक सबसे बड़ी झूठ उत्पाद फैक्ट्री है। आज कल एक नया ट्रेंड यह फैक्ट्री चला रही है कि जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं वो वामपंथी हैं, चीनी दलाल हैं….। इस झूठ के पीछे सच का एक पूरा महासागर छिपा दिया गया है। आइए उस महासागर के दर्शन कराता हूं। दूसरों को, खासकर अपने विरोधियों को चीन का एजेंट घोषित करने वाली बीजेपी और उसके नेता नरेंद्र मोदी गुजरात का मुख्यमंत्री होने के वक्त से ही तथाकथित गुजरात माडल को खड़ा करने के लिए किस तरह से चीन के आगे बिछे रहे इसके जीवंत उदाहरण मौजूद हैं।‌

बीजेपी और चीन कम्युनिस्ट पार्टी के बीच 2007 से गहरे संबंध हैं। 2007 से ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) से संबंध रहे हैं और राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और अमित शाह जैसे उसके अध्यक्षों का चीन के साथ अधिकतम संपर्क रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत के इतिहास में ऐसा कोई राजनीतिक दल नहीं है जिसके अध्यक्षों का बीते 13 वर्षों में चीन के साथ इतना संपर्क रहा है।

जनवरी 2007 और अक्टूबर 2008 में राजनाथ सिंह की सीपीसी से बात हुई, जनवरी 2011 में गडकरी पांच दिन के आधिकारिक दौरे पर चीन गए और शाह ने 2014 की शुरुआत में पार्टी विधायकों के एक प्रतिनिधिममंडल को चीन भेजा। वर्ष 2019 में भी बीजेपी नेताओं का प्रतिनिधि मंडल छह दिनों के लिए चीन गया और सीपीसी से मुलाकात की।

वर्ष 2019 में चीन दौरे पर गये बीजेपी नेता कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के नेताओं के साथ

कोरोना की पहली लहर के दौरान बनाए गए विवादास्पद पीएम केयर्स फंड में चीनी कंपनियों से उस वक्त दान लिया गया जब वह लेह व लद्दाख में अपनी सेनाएं भेज चुका था।

इन दानकर्ताओं में चीनी टेलिकॉम और मोबाइल कंपनी Xiaomi, Huawei, OnePlus, TickTock और Oppo के भी शामिल होने की खबर सामने आई। TikTok का योगदान भी रहा। पीएम केयर्स फंड में सबसे ज्यादा दान करने वाली चीनी कंपनियों में शॉर्ट वीडियो मेकिंग ऐप TikTok (टिकटॉक) रही थी। इसने 30 करोड़ रुपए दान किये थे। इतना ही नहीं चीनी ऐप टिकटॉक द्वारा कोरोना वायरस को लेकर जागरुकता फैलाने का काम भी किया है। इस बारे में स्वयं सरकार के MyGov और प्रेस इन्फार्मेशन ब्यूरो (PIB) हैंडल ने भी इस ऐप का इस्तेमाल जागरुकता फैलाने के लिए किया है।

चीनी मोबाइल कम्पनियों का योगदान

चीन की सबसे बड़ी और जानी-मानी मोबाइल निर्माता कंपनी Xiaomi द्वारा पीएम केयर्स फंड में 3 दिन के अंदर कुल 15 करोड़ रुपए की राशि दान की गई है। बता दें, इनमें 10 करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड के लिए और 5 करोड़ रुपए अलग-अलग राज्यों के सीएम केयर्स फंड के लिए दान की गई थी। इतना ही नहीं Xiaomi ने गिव इंडिया प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर 1 करोड़ रुपए की राशि जुटाने का भी लक्ष्य रखा था। जिसके तहत 20 हजार परिवारों को साबुन, सैनिटाइजर और मास्क उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई थी।

चीन की बड़ी टेलिकॉम कंपनी Huawei ने भी पीएम केयर्स फंड में 7 करोड़ रुपए का योगदान दिया था। इसके साथ ही Huawei द्वारा भारतीय अफसरों को कोरोना संदिग्धों की जांच करने के लिए तापमान जांचने से संबंधी टेक्नोलॉजी साझा करने का प्रस्ताव भी दिया था। चीन की BBK इलेक्ट्रॉनिक्स की दो मोबाइल कंपनियों में OnePlus और Oppo ने भी पीएम केयर्स फंड में 1-1 करोड़ रुपए देकर अपना योगदान दिया था।

कर्ज के भंवर में गुजरात !

वर्ष 2012-13 में गुजरात राज्य की सरकार पर 1 लाख 66 हजार 667 करोड़ का कर्ज था जो वर्ष 2016-17 में बढक़र 2 लाख 43 हजार 146 करोड़ हो चुका है। इस तरह राज्य सरकार के कर्ज में 9.98 फीसदी की वृद्धि देखने को मिल रही है। दूसरी ओर कर्ज चुकाए जाने की कोई व्यवस्था या ठोस नीति नहीं होने के कारण आगामी समय में राज्य सरकार को विकास के मद में खर्च करने में फूंक-फूंक कर कदम उठाना होगा।

राज्य विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार के हर वर्ष नए कर्ज की रकम से पहले के कर्ज का ब्याज, ब्याज का पुनर्भुगतान करने के बाद राज्य सरकार के पास कोई विशेष रकम नहीं बचती है।

राज्य सरकार पर वर्ष 2016-17 में 2 लाख 43 हजार 146 करोड़ का कर्ज था। इस वर्ष राज्य सरकार ने कर्ज की जो रकम ली थी उसमें से मूलधन व ब्याज भुगतान की रकम वर्ष 2015-16 में 2477 करोड़ बची वहीं वर्ष 2016-17 में 4259 करोड़ बची।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016-17 के अंत में राज्य का कुल कर्ज 2 लाख 43 हजार 146 करोड़ था। इसके तहत कर्ज के रूप में राज्य सरकार को वर्ष 2017-2018 में 13,624.95 करोड़, वर्ष 2018 से वर्ष 2020 तक 31,893.74 करोड़, वर्ष 2020 से वर्ष 2022 तक 40, 631.51 करोड़ तथा वर्ष 2022 से वर्ष 2024 तक 38,939.01 करोड़ रुपए चुकानी होगी। इससे राज्य सरकार के बजट पर भार पड़ेगा। इस तरह राज्य को अगले सात वर्षों में 1 लाख 25 हजार 94 करोड़ रुपए चुकाने होंगे। जो कुल सार्वजनिक कर्ज का 62.75 करोड़ फीसदी होगा।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की है कि राज्य सरकार को कर्ज के भुगतान के लिए सोच-विचार कर उचित रणनीति बनानी होगी। इस रणनीति का तत्काल रूप से अमलीकरण करना होगा। 12वें वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक वर्ष 2009-10 तक ब्याज भुगतान व राजस्व प्राप्ति के अनुपात को 15 फीसदी तक कम करना चाहिए था। हालांकि राज्य का वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 के दौरान कुल कर्ज औसत ब्याज भुगतान 16.40 फीसदी था जो सिफारिश से ज्यादा था।

गुजरात कर्ज के एक खतरनाक मकड़ जाल में फंस चुका है। राज्य सरकार के माथे एक तरफ लाखों करोड़ रुपये का कर्ज है वहीं हर वर्ष कर्ज के रूप में हजारों करोड़ रुपये का ब्याज भी चुकाना है, तब स्वाभाविक रूप से हर वर्ष राज्य सरकार को नया कर्ज लेना होगा।

चीन ने गुजरात में किया सबसे ज्यादा निवेश

चीनी कंपनियों ने भारतीय बाज़ार में अपनी ज़बरदस्त पैठ बना रखी है और पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में ऊर्जा, स्टील और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारी निवेश कर रखा है। दिलचस्प यह है कि इन चीनी कंपनियों की राह खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने आसान की थी।

चंद चीनी ऐप बंद करके और पालतू मीडिया में चीन की अर्थव्यवस्था को मोदी का घूंसा दिखाने, बताने वाली सरकार का असल सच ये है कि जब गलवान वैली में चीनी सेना के साथ झड़प में 20 सैनिकों की मौत के बाद देशभर में उबाल था और चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मांग ज़ोर पकड़ रही थी, उस वक्त भी पीएम मोदी के गृहराज्य में चीनी कंपनियों ने अपने पंजे गड़ा रखे थे।

दुनियाभर में निवेश पर शोध करने वाली ब्रुकिंग्स इंडिया की मार्च की रिपोर्ट बताती है कि चीनी कंपनी टेबियन इलेक्ट्रिक एपरेटस देश में उर्जा से जुड़े भारी उपकरण बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है।

साल 2014 में जब चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग भारत दौरे पर आये थे, तब इस कंपनी ने गुजरात में इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की घोषणा की थी। गुजरात में इस कंपनी ने ट्रांसफार्मर बनाने का प्लांट लगाया जिसमे 400 मिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया और अबतक 150 मिलियन डॉलर का निवेश किया भी जा चुका है।

एक वक्त चीनी सेना ‘पीएलए’ द्वारा स्थापित ज़िंगज़िंग कंपनी भारत के स्टील प्लांटों में ज़बरदस्त तरीके से निवेश कर रही है। चीनी सेना इस कंपनी को कई साल तक चलाती रही है, हालांकि बाद में चीनी सेना में हुए सुधारों के तहत इस कंपनी को सेना से अलग कर दिया गया। एक और चीनी कंपनी शिंगशान होल्डिंग समूह ने भी भारत में जॉइंट वेंचर के तहत गुजरात के ढोलेरा इंडस्ट्रीयल एरिया में एक स्टील प्लांट में 1 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस कंपनी का लक्ष्य है कि आगे चलकर स्टील प्लांटों में 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश किया जाये।

इसके अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी चीनी कंपनियों ने गुजरात में जमकर निवेश किया है। साल 2019 में शंघाई की ऑटोमोबाइल कंपनी एसएआईसी मोटर कॉरपोरेशन भारत पहुंची। तब कंपनी ने ऐलान किया था कि उसका ब्रांड एमजी मोटर्स भारतीय ग्राहकों की ज़रूरतों और सहूलियतों के मुताबिक गाड़ियों का उत्पादन करेगा। इसके लिए कंपनी ने गुजरात के हलोल में जनरल मोटर्स के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 2000 करोड़ रुपए के निवेश का ऐलान किया। इसके अलावा यह चीनी कंपनी भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में 350 मिलियन डॉलर के और निवेश की तैयारी कर रही है। इन चीनी कंपनियों को गुजरात में निवेश के लिए पीएम मोदी ने बड़ी मेहनत की है।

इसलिए भाजपा आईटी सेल को बीजेपी और मोदी सरकार पर सवाल उठाने वालों को वामी, कम्युनिस्ट…कहने से पहले सोचना चाहिए कि ये जरूरी नहीं कि हर आदमी का ऊपर का माला खाली हो। वह पढ़ने-लिखने वाला शख्स भी हो सकता है और अगर उसने पलट कर तथ्यात्मक जानकारी सामने रख दी तो किरकिरी बीजेपी की ही होगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। लेख में दर्ज विचार उनके निजी विचार हैं)

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