रवीश कुमार ने पीएम मोदी को खुला खत लिख तंज कसा- ‘मैं दुबला हो गया हूं, बाल भी उड़ गए हैं..’, लेेेेटर वायरल

Read Time: 4 minutes

दुनिया हंस रही है कि भारत में मंदिर निर्माण के लिए चंदा वसूलने का काम रहते हुए भी युवा नौकरी मांग रहे हैं। मैं नहीं चाहता कि भारत की बदनामी हो।

-रवीश के पत्र से

एनडीटीवी के एंकर और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने सोशल मीडिया में खुला खत लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। फेसबुक पर लिखे रवीश कुमार ने अपने इस ओपन लेटर में बेरोजगारी का मुद्दा उठाया है। रवीश कुमार ने देश के युवाओं की भी चुटकी ली है। रवीश ने लिखा है कि प्रधानमंत्री जी आप इन बेरोजगारों को नौकरी मत दीजिए, इन्हें मंदिर निर्माण के चंदा वसूली की रसीद ही दे दीजिए।

रवीश कुमार ने अपने खत में लिखा– “माननीय प्रधानमंत्री जी, मैं टूलकिट से परेशान हूं। बेरोज़गार अपने आंदोलन को ध्यान में लाने के लिए जो टूलकिट बनाते हैं उसमें मेरा फोन नंबर डाल देते हैं। अपनी बर्बादी का लंबा चौड़ा ब्यौरा भी डाल देते हैं। मैं आपके मंत्रिमंडल में रोज़गार मंत्री भी नहीं हूं। आपकी पार्टी के आई टी सेल का चीफ भी नहीं हूं। इन युवाओं के बार-बार लिखने से भारत की छवि ख़राब हो रही है। 

दुनिया हंस रही है कि भारत में मंदिर निर्माण के लिए चंदा वसूलने का काम रहते हुए भी युवा नौकरी मांग रहे हैं। मैं नहीं चाहता कि भारत की बदनामी हो।

यह पत्र इसलिए नहीं लिख रहा कि आप बेरोज़गारों को नौकरी दे दें। आप ऐसा नहीं भी करेंगे तब भी युवाओं का वोट आपको ही जाएगा। आपको यकीन न हो तो धरना प्रदर्शन करने वाले युवाओं के बीच सर्वे करा लीजिए। मैं जानता हूं कि रोज़गार मुद्दा नहीं रहा। राजनीति में धर्म का सबसे बड़ा योगदान तो यही है कि वह राजनीति को ही ख़त्म कर देता है। धर्म का आधार न्याय होता है। लेकिन राजनीति में धर्म का काम अन्याय करना और उस पर पर्दे डालना होता है। इन युवाओं को अगर रोज़गार से भी बढ़ कर कुछ चाहिए तो धर्म का गौरव चाहिए। धर्म की पहचान चाहिए। बंगाल में आप जय श्री राम के नारे लगाने को मुद्दा बना रहे हैं। यूपी बिहार में यह काम तो उससे भी आसान है।

आप यूपी बिहार के युवाओं को मंदिर निर्माण के चंदे की रसीद पकड़ा दें। जहां जहां वे धरना दे रहे हैं वहां वहां जाकर चंदे की रसीद दे दें। आप देखिए कितनी खुशी से सारे युवा इस काम में लग जाएंगे। उनका पूरा परिवार इस काम में लग जाएगा। जब इतने से भारत में बेरोज़गारी की समस्या ख़त्म हो सकती है तो फिर इसे करने में देरी क्यों हो रही है। युवा गली गली में गर्व से घूमने लगेंगे। चंदा न देने वालों को सबक भी सिखा देंगे। आख़िर राष्ट्रनिर्माण के कर्तव्यों से इन युवाओं को क्यों वंचित रखा जा रहा है। युवा को परीक्षा की तारीख नहीं चाहिए। चंदे की राशि का लक्ष्य चाहिए। आप दे दीजिए।

बस इन बेरोज़गारों से कहिए कि मुझे परेशान करने के लिए टूलकिट न बनाएं। इन बेरोज़गारों ने न तो दिशा रवि का नाम सुना है और न ही उसके साथ जो हुआ उसे ग़लत बोलने की हिम्मत भी है। कई बार ये मुझे ग़लत साबित कर देते हैं लेकिन यह पलड़ा आपके पक्ष में भारी है। वे हमेशा आपको सही साबित कर देते हैं। ऐसे युवाओं को आप चंदा वसूलने की रसीद नहीं देंगे तो कौन देगा।

मुझसे हर दिन हज़ारों मैसेज डिलिट नहीं होते हैं। थक गया हूं। आपने देखा ही होगा कि बाल उड़ गए हैं। दुबला हो गया हूँ। इतना योगा किया। सातों दिन काम किया। कभी सोया भी नहीं तब भी मेरा यह हाल हो गया है। आप प्लीज़ इन युवाओं को संभालिए।”

रवीश कुमार का यह ओपन लेटर वायरल हो रहा है। ज्यादातर सोशल मीडिया यूजर्स इस लेटर में उठाए गए बेरोजगारी के सवाल पर केंद्र सरकार को कोस रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related

किसान आन्दोलन से जुड़ने दिल्ली पहुँच रही हैं 40 हज़ार महिलाएं

Post Views: 14 पंजाब के अलग-अलग इलाक़ों से तकरीबन 40 हज़ार महिलाएं इस आन्दोलन में भाग लेने के लिए आ रही हैं, वे ट्रैक्टरों, बसों और मिनी-बसों में बैठ कर अपने-अपने गाँवों से कूच कर चुकी हैं या करने वाली हैं। ● पूर्वा स्टार ब्यूरो कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली के पास पिछले तीन महीने […]

डीजल-पेट्रोल के बढ़े दाम पर संसद में हंगामा, राज्यसभा स्थगित

Post Views: 11 संसद के बजट सत्र का दूसरा हिस्सा आज ज्यों ही शुरू हुआ, डीजल पेट्रोल की बढ़ती क़ीमतों को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस के सांसद डीजल-पेट्रोल की बढ़ी क़ीमतों पर चर्चा कराने की मांग कर रहे थे। ● पूर्वा स्टार ब्यूरो संसद के बजट सत्र का दूसरा हिस्सा आज ज्यों […]

सब कुछ एक जैसा ही क्यों हो!

Post Views: 12 इस देश की प्रकृति में कहीं भी एकरूपता नहीं है। उत्तर में पहाड़ हैं, पश्चिम में रेगिस्तान, दक्षिण में समुद्र है और पूर्व तक फैला विशाल उपजाऊ मैदान। सैकड़ों दो-आबे हैं। यहाँ हर एक की आस्था भिन्न है, बोली अलग है और कई बार तो परस्पर विपरीत भी है। तब कैसे किसी एक सार्वभौमिक […]

error: Content is protected !!
Designed and Developed by CodesGesture