नाट्य प्रस्तुति और जनगीत गायन से आरिफ अज़ीज़ लेनिन को याद किया गया

Read Time: 3 minutes

वरिष्ठ रंगकर्मी आरिफ अजीज लेनिन की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को प्रेमचंद पार्क में जनगीत गायन और नाटक ‘अभी वही है निजामे कोहना -3’ का मंचन हुआ। नाटक में कोरोना महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों की स्थिति और शासन सत्ता द्वारा किये गए क्रूर व्यवहार को दिखाया गया।

● पूूर्वा स्टार ब्यूरो

गोरखपुर। प्रेमचंद साहित्य संस्थान और अलख कला समूह द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत जेएन शाह और उनके साथियों द्वारा प्रस्तुत गीतों से हुई। जेएन शाह ने सबसे पहले कबीर की रचना ‘मन लागो यार फकीरी में‘ प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने किसान गीत ‘चांदी के रुपइया लुटावे असमनवा, भोर की किरनवा सोनवा‘ गाया। शाह और उनके साथियों ने इसके बाद ‘सारी जिनगी गुलामी में सिरान पिया’, ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’, ‘इसलिए राह संघर्ष की हम चुनें, जिंदगी आंसुओ में नहाई न हो’ गाया। ‘हम हैं ताना बाना, हम ही चदरिया हम ही जुलाहा’ से जनगीतों का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

इसके बाद अलख कला समूह के कलाकारों ने वरिष्ठ रंगकर्मी राजाराम चौधरी द्वारा लिखित नाटक ‘अभी वही है निजामे कोहना – 3′ का मंचन किया। यह नाटक कोरोना महामारी में प्रवासी मजदूरों के पलायन और शहर से गांव तक उनके उत्पीड़न, भेदभाव को मार्मिक तरीके से दर्शकों के सामने रखा। नाटक के अंत में शासन सत्ता की क्रूरता और दमन के खिलाफ किसान-मजदूर उठ खड़े होते हैं।

नाटक में धनिया की भूमिका अनन्या, होरी की निखिल वर्मा, गब्बर सिंह की रजत, माखन की राम दयाल गौड़, लाखन की अनीस वारसी, शायरा की मनीषा, सिपाही की प्रियेश पांडेय, नेता की राकेश कुमार ने अभिनीत की। कोरस में नेहा थीं। रूप सज्जा एवं मंच परिकल्पना देश बंधु की थी।

कार्यक्रम का संचालन प्रेमचंद साहित्य संस्थान के सचिव वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार सिंह ने किया। इस मौके पर प्रो. राजेश मल्ल, राजेश सिंह, अब्दुल्लाह सिराज, एसआर रहमान, शिवनंदन, लाल बहादुर, विकास द्विवेदी, श्याम मिलन एडवोकेट, बैजनाथ मिश्र, सुरेश सिंह, राजू मौर्य, गीता पांडेय, सुजीत श्रीवास्तव, ओंकार सिंह, पवन कुमार, चक्रपाणि ओझा आदि उपस्थित थे। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related

प्रभाष जोशी : जिन्होंने अख़बारों में छप रही हिंदी को बनावटी से खांटी देसी बनाया

Post Views: 27 आज देश में एक से छह नंबर तक जो हिंदी अखबार छाए हैं उनकी भाषा देखिए जो अस्सी के दशक की भाषा से एकदम अलग है। प्रभाष जी का यह एक बड़ा योगदान है जिसे नकारना हिंदी समाज के लिए मुश्किल है। ● शंभूनाथ शुक्ल आज प्रिंट मीडिया में सिरमौर रहे जनसत्ता […]

लोकतन्त्र की सेहत के लिए यह ठीक नहीं है

Post Views: 48 ● धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव दबंगों का लठैत जब किसी अबला की इज्जत लूट लेता है तो उसे लेकर लोग चीखते हैं। इसे लेकर कमजोरों में गुस्सा बढ़ता है तो दंबगों की ओर से यही कहा जाता है कि जवानी की उत्साह में लड़का गलती कर गया है। वह पहचान नहीं पाया कि […]

गांधी की हत्या पर नये खुलासे करती एक किताब!

Post Views: 70 एक तबका गांधी की हत्या को सही ठहराने की भौंडी और वीभत्स कोशिश कर रहा है। तब एक बार फिर गांधी की हत्या पर नये सिरे से पड़ताल की ज़रूरत थी। अब यह नई कोशिश एक किताब- ‘उसने गांधी को क्यों मारा’ की शक्ल में सामने आयी है।  ● हिमांशु जोशी  गांधी एक […]

error: Content is protected !!
Designed and Developed by CodesGesture