बगावत

Read Time: < 1 minute

मुझे गुनहगार साबित कर दें, ये आपकी अदालत है,
अगर ऐसा आप करते हैं, तो ये आपकी जहालत है।

मुझे इल्म है कि आपकी कलम अब दबाव में रहती है,
अगर ऐसा है तो यह सच के साथ खिलाफत है।

मेरा हाकिम अब हिटलर बनना चाहता है,
अगर ऐसा है, तो मेरे हाकिम तुझ पे लानत है।

तेरे चाहने वाले तुझसे बहुत उम्मीदें करते हैं,
 सच बता, क्या अब भी उनकी उम्मीदें सलामत हैं।

इस स्याह रात में भी सच बोलने की हिम्मत कर रहे हो अंकित,
अगर ऐसा करना बगावत है, तो हां ये बगावत है।।

अंकित पांडेय टाईगर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ‘धीरु भाई’ की कविताओं में किसान आंदोलन

Post Views: 65 (1) ‘लोकतंत्र मरने मत देना’ हे रे भाई, हे रे साथी।पुरखों से हासिल आज़ादी।लोकतंत्र की जलती बाती।यह बाती बुझने मत देना।लोकतंत्र मरने मत देना। सिक्कों के झनकारों में फंस।ओहदों और अनारों में फंस।जात धर्म के नारों में फंस।खेती को जलने मत देना।लोकतंत्र मरने मत देना। जंगल नदी पहाड़ व पानी।उजली धोती साड़ी […]

नाट्य प्रस्तुति और जनगीत गायन से आरिफ अज़ीज़ लेनिन को याद किया गया

Post Views: 14 वरिष्ठ रंगकर्मी आरिफ अजीज लेनिन की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को प्रेमचंद पार्क में जनगीत गायन और नाटक ‘अभी वही है निजामे कोहना -3’ का मंचन हुआ। नाटक में कोरोना महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों की स्थिति और शासन सत्ता द्वारा किये गए क्रूर व्यवहार को दिखाया गया। ● पूूर्वा स्टार ब्यूरो […]

कविता के रंग

Post Views: 54 वेद प्रकाश कविता अपने जन्म से ही मन को आंदोलित करती रही है । वैसे, कविता मूलत: लोग गीत को ही आज भी मानते हैं । कविता गीत का रूप हो सकती है, लेकिन, जब केवल कविता की बात होगी तो, उसमें हमारे ऊबड़-खाबड़ हिस्से शामिल हो जाते हैं। मैं इसकी शुरूआत […]

error: Content is protected !!
Designed and Developed by CodesGesture