पक्षपात का आरोप झेल रहे फ़ेसबुक ने अंखी दास से किया किनारा

Read Time: 3 minutes

भारी जनदबाव और मुकदमेंबाजी के बीच
अंखी दास ने फेसबुक से इस्तीफा दिया

दास पर ये आरोप लगे थे कि उन्होंने भाजपा और अन्य दक्षिण पंथी संगठनों के नफरत फैलाने वाले बयानों पर रोक लगाने से जुड़े नियमों को लागू करने का कथित रूप से विरोध किया था।

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक की सार्वजनिक नीति मामलों की प्रमुख अंखी दास ने मंगलवार को पद से इस्तीफा दे दिया। वह सोशल मीडिया मंच पर नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों पर रोक लगाने के मामले में कथित तौर पर पक्षपात बरतने को लेकर विवादों में थी।

हालांकि, फेसबुक ने उनके इस्तीफे को विवादस्पद मामले से नहीं जोड़ा है और कहा है कि ये उनका खुद का निर्णय है और इसका किसी विवाद से कोई संबंध नहीं है। जबकि जानकार दास के इस्तीफे को 15 अगस्त को ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट और उसके बाद छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार आवेश तिवारी और अंखी दास के बीच हुई मुकदमेंबाजी से जोड़ रहे हैं।

फेसबुक के भारत में प्रबंध निदेशक अजीत मोहन ने ई-मेल के जरिये बयान में कहा, ‘अंखी दास ने फेसबुक में अपने पद से हटने का निर्णय किया है। उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिये यह कदम उठाया है। अंखी हमारे उन पुराने कर्मचारियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत में कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभायी। वह पिछले नौ साल से अधिक समय से अपनी सेवा दे रही थी।’

दास पर ये आरोप लगे थे कि उन्होंने भाजपा और अन्य दक्षिण पंथी संगठनों के नफरत फैलाने वाले बयानों पर रोक लगाने से जुड़े नियमों को लागू करने का कथित रूप से विरोध किया था। उन पर ये भी आरोप लगे थे कि उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों के फेसबुक ग्रुप पर कई साल तक भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में संदेश पोस्ट किये।

उन्होंने मामला प्रकाश में आने के करीब ढाई महीने बाद पद से इस्तीफा दिया है।

चालीस से अधिक मानवाधिकार संगठनों और इंटरनेट पर नजर रखने वाले संगठनों ने फेसबुक से दास को तब तक छुट्टी पर भेजने को कहा था, जब तक कंपनी अपने भारतीय परिचालन के ऑडिट का काम पूरा नहीं कर लेती।

दास को लेकर विवाद 15 अगस्त को वाल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में उन पर आरोप लगाया गया कि अंखी दास ने भाजपा अैर अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े नेताओं के नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों के खिलाफ कार्रवाई को बाधित किया।

रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के एक दिन पहले दास ने लिखा था, ‘हमने उनके सोशल मीडिया अभियान की हवा निकाल दी और बाकी निश्चित रूप से इतिहास है।’

उन्होंने यह भी लिखा कि नरेंद्र मोदी मजबूत नेता हैं, जिन्होंने पूर्व सत्तारूढ़ दल के किले को ध्वस्त कर दिया।

वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अंखी दास ने 2012 के विधानसभा चुनावों के लिये भाजपा को सोशल मीडिया अभियान के लिये प्रशिक्षित किया।

प्रशिक्षण के बाद उन्होंने लिखा, ‘हमारे गुजरात अभियान में सफलता।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related

आखिर किसान क्या चाहते हैं जो सरकार उन्हें नहीं देना चाहती?

Post Views: 17 ● अनिल जैन केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के किसानों के असंतोष ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। अपना विरोध जताने को दिल्ली पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे किसानों को रोकने के लिए पहले तो सरकार ने कड़ाके की सर्दी में पानी की […]

दिल्ली बॉर्डर पर जमे हैं किसान, आगे की रणनीति बनाने में जुटे

Post Views: 20 ● पूर्वा स्टार ब्यूरो कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ मोदी सरकार को अपनी एकजुटता का अहसास करा चुके हरियाणा और पंजाब के किसान शुक्रवार रात भर दिल्ली-हरियाणा के सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर जमे रहे। आन्दोलनरत किसानों का साथ देने के लिए आज उत्तर प्रदेश से भी कई किसान संगठनों के दिल्ली बॉर्डर पहुंचने […]

संविधान! तुम्हें कैसे बचाए?

Post Views: 21 ● कनक तिवारी  सत्तर वर्षों के बाद संविधान की जुगाली करते करते यही समझ आया है कि विधायिकाओं, मंत्रालयों, राजभवनों और न्यायालयों में दैनिक हाज़िरी भरते आईन को सड़कों पर चलने का वक्त ही नहीं मिल पाया। संविधान की सड़क व्याख्या की देश को ज़्यादा ज़रूरत है। वह पेटभरे उद्योगपतियों, नौकरशाहों, राजनेताओं, […]

error: Content is protected !!